Tata Sons की सालाना आम बैठक (AGM) में कोरम की कमी के चलते बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। Sir Ratan Tata Trust पर लगी नियामक पाबंदियों की वजह से कंपनी कानूनी पेचीदगियों में फंस गई है।
Tata Sons की 18 अगस्त को हुई सालाना आम बैठक कोरम पूरा न होने के कारण बेनतीजा रही। इस देरी के चलते कंपनी को Registrar of Companies से 3 महीने का विस्तार (extension) लेना पड़ा है। समस्या की जड़ कंपनी के आंतरिक नियम हैं, जिसके तहत बैठक शुरू करने के लिए Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust दोनों के प्रतिनिधियों का मौजूद होना अनिवार्य है। फिलहाल, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की पाबंदियों के कारण Sir Ratan Tata Trust के शामिल न हो पाने से यह रुकावट पैदा हुई है।
बोर्ड में मतभेद और भविष्य की चुनौतियां
यह देरी इसलिए भी अहम है क्योंकि बैठक में N Chandrasekaran के निदेशक के तौर पर पुनर्नियुक्ति का मुद्दा अटका हुआ है। इसके अलावा, कंपनी में अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने N Chandrasekaran को फिर से चेयरमैन बनाने और Tata Sons की लिस्टिंग के प्रस्तावों पर असहमति जताई है।
NCLT का रुख और संभावित जोखिम
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, Tata Sons कंपनी अधिनियम की धारा 97 के तहत NCLT का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है। कानून के जानकार बताते हैं कि यदि NCLT के आदेश से कोरम को वैध मान भी लिया जाता है, तो भी कंपनी पर भविष्य में मुकदमेबाजी का खतरा बना रह सकता है, क्योंकि इसे नियामक आदेशों की अनदेखी के रूप में देखा जा सकता है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या कंपनी बिना किसी विवाद के इस प्रशासनिक संकट से बाहर निकल पाती है या नहीं।
