Tata Sons IPO: गवर्नेंस में बड़े बदलाव की तैयारी, क्या कम होगी टाटा ट्रस्ट्स की ताकत?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tata Sons IPO: गवर्नेंस में बड़े बदलाव की तैयारी, क्या कम होगी टाटा ट्रस्ट्स की ताकत?

Tata Sons अपने इंटरनल गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव कर रहा है। RBI के 'अपर लेयर' NBFC नियमों के तहत कंपनी का पब्लिक लिस्टिंग यानी IPO लाना अनिवार्य है, जिसके लिए उसे अब SEBI के सख्त नियमों के दायरे में आना होगा।

बदलेंगे कंपनी के नियम

Tata Sons अपनी 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' (Articles of Association) की समीक्षा कर रहा है। यह कदम उठाना इसलिए जरूरी है क्योंकि RBI ने इसे 'अपर लेयर' एनबीएफसी (NBFC) का दर्जा दिया है, जिसके चलते कंपनी के लिए स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना अनिवार्य हो गया है।

टाटा ट्रस्ट्स की स्पेशल पावर पर संकट?

वर्तमान में, Tata Trusts के पास कंपनी की 66% हिस्सेदारी है और इसके पास विशेष अधिकार (Special Rights) हैं, जिससे वे बोर्ड मेंबर्स की नियुक्ति और अहम फैसलों पर वीटो जैसी पावर रखते हैं। लेकिन, पब्लिक कंपनी बनने के बाद SEBI के नियम लागू होंगे।

SEBI के नियमों की चुनौती

SEBI के रेगुलेशन 31B के तहत, प्रमोटर्स को अपने स्पेशल अधिकारों को पब्लिक शेयरहोल्डर्स से समय-समय पर मंजूर कराना होगा। साथ ही, कंपनी को स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की संख्या और बोर्ड कमेटियों को मार्केट के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक ढालना होगा।

निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

इस लिस्टिंग से Tata Sons एक प्राइवेट ट्रस्ट-डोमिनेटेड मॉडल से निकलकर पब्लिक जवाबदेही वाले ढांचे में आ जाएगी। कंपनी को अपने शेयर ट्रांसफर पर लगी पाबंदियों को भी हटाना होगा ताकि सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग मुमकिन हो सके। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी अपनी पारंपरिक गवर्नेंस और लिस्टेड कंपनी के नियमों के बीच तालमेल कैसे बैठाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.