टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में सोमवार को दबाव दिखा। इसकी मुख्य वजह Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran की नियुक्ति को लेकर Tata Trusts के साथ उपजा विवाद है। नोएल टाटा द्वारा विरोध दर्ज करने के बाद से ही ग्रुप में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
अपनी बेहतरीन कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए मशहूर टाटा ग्रुप में अब अंदरूनी कलह सामने आई है। विवाद की जड़ 17 सितंबर का वह बोर्ड रेजोल्यूशन है, जिसमें N Chandrasekaran को तीसरे कार्यकाल के लिए मंजूरी दी गई थी। बोर्ड ने 4:1 के बहुमत से यह फैसला लिया था, लेकिन 66% हिस्सेदारी रखने वाले Tata Trusts के प्रतिनिधि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ अपना वोट दिया।
क्या है कानूनी पेंच?
टाटा ट्रस्ट्स का तर्क है कि Tata Sons के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, इसे सिर्फ एक साधारण संख्यात्मक बहुमत से पास नहीं किया जा सकता। चर्चाएं तेज हैं कि मामला अदालत तक पहुंच सकता है, जिससे लीडरशिप ट्रांजिशन की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
बाजार पर असर
निवेशकों की घबराहट साफ देखी जा सकती है। Tata Chemicals में 3% और NELCO में 2.7% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, Tata Power, Tata Investment Corporation और Tata Technologies के शेयर भी करीब 2% नीचे फिसल गए। हालांकि, बाजार का रुख मिला-जुला रहा; Tata Steel और Indian Hotels जैसे शेयरों ने इस दबाव के बीच भी तेजी दिखाई।
निवेशकों के लिए जोखिम
ऐतिहासिक रूप से टाटा कंपनियों को उनकी स्थिर लीडरशिप के कारण बाजार में 'प्रीमियम' वैल्यूएशन मिलता रहा है। यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो ग्रुप की साख और इसके स्टैबिलिटी प्रीमियम पर असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टाटा संस की ओर से कोई स्पष्टीकरण आता है या दोनों पक्षों के बीच कोई आपसी सहमति बन पाती है।
