डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने कमर कस ली है। अब OTP के लिए एक यूनिवर्सल SMS टेम्पलेट अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि धोखाधड़ी से होने वाले ₹22,495 करोड़ के नुकसान पर लगाम लगाई जा सके।
क्या है TRAI का नया प्लान?
देश में तेजी से बढ़ते साइबर क्राइम को देखते हुए TRAI एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है जहां सभी बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को OTP भेजने के लिए एक ही तरह का 'स्टैंडर्ड टेम्पलेट' इस्तेमाल करना होगा। वर्तमान में हर कंपनी का अपना अलग फॉर्मेट है, जिसका फायदा उठाकर स्कैमर्स फर्जी मैसेज भेजते हैं। इस नए बदलाव से यूजर्स आसानी से असली और नकली मैसेज में फर्क कर पाएंगे।
कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि इस नियम के लागू होते ही बैंकों, पेमेंट गेटवे और ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने इंटरनल सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव करने होंगे। इस रेगुलेटरी कंप्लायंस के चलते इन कंपनियों के टेक्नोलॉजी खर्च (Tech Cost) में बढ़ोतरी की संभावना है।
साइबर फ्रॉड के बढ़ते आंकड़े
साल 2025 में डिजिटल फ्रॉड का आंकड़ा ₹22,495 करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साइबर क्राइम की शिकायतें 2021 में 2.62 लाख थीं, जो अब बढ़कर 24 लाख (2.4 Million) हो गई हैं। सरकार ने पहले ही ASTR सॉल्यूशन और Financial Risk Indicator जैसे टूल्स तैनात किए हैं, लेकिन फ्रॉड की बढ़ती संख्या एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
अभी मार्केट की नजरें TRAI के आने वाले कंसल्टेशन पेपर पर हैं, जिसमें तकनीकी जरूरतों और इसे लागू करने की समय-सीमा (Timeline) साफ होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को अपनी मौजूदा ग्लोबल सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म्स में इन नए स्थानीय नियमों को फिट करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ सकते हैं, जिसका असर उनके मुनाफे पर दिख सकता है।
