TRAI ने इंटरनेट-आधारित टीवी (ALTD) सेवाओं के लिए एक नया नियम पेश किया है। अब इन प्लेटफॉर्म्स को **20 साल** की वैलिडिटी वाले लाइसेंस के लिए **₹1 लाख** का एंट्री शुल्क देना होगा।
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और लाइसेंसिंग
TRAI ने एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सेवाओं को एक औपचारिक दायरे में लाने की तैयारी कर ली है। अब ये इंटरनेट-नेटिव चैनल और एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी की तरह ही विनियमित (Regulated) होंगे। इस नए ढांचे के तहत कंपनियों को 20 साल के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए ₹1 लाख का वन-टाइम एंट्री शुल्क और ₹10,000 की प्रोसेसिंग फीस तय की गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट-आधारित सेवाओं और पारंपरिक केबल या DTH ऑपरेटरों के बीच एक समान प्रतिस्पर्धी माहौल बनाना है।
Smart TV मेकर्स के लिए नई शर्तें
इस नियम का सीधा असर Smart TV बनाने वाली कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोवाइडर्स पर पड़ेगा। अब इन डिवाइस मेकर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके टीवी पर केवल वही ALTD एप्लिकेशन उपलब्ध हों, जिन्हें मंत्रालय से मंजूरी मिली हो। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा एक रिपॉजिटरी (Repository) सिस्टम बनाया जाएगा, जिसके तहत डिवाइस कंपनियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
व्यूअरशिप डेटा का एकीकरण
इस नीति का एक बड़ा पहलू व्यूअरशिप डेटा को ट्रैक करना है। अब इंटरनेट-आधारित टीवी प्रदाता अपना व्यूअरशिप डेटा जारी कर पाएंगे, जिसे आगे चलकर नेशनल टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क में शामिल किया जा सकता है। यह कदम मीडिया कंपनियों और विज्ञापनदाताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की पहुंच का सटीक डेटा मिल सकेगा।
हालांकि, इस नियम के दायरे से उन प्लेटफॉर्म्स को बाहर रखा गया है जो केवल अपना खुद का कंटेंट दिखाते हैं या जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव स्ट्रीम करते हैं। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्रालय इन गाइडलाइंस को कैसे लागू करता है और इसका विज्ञापन राजस्व (Ad Revenue) पर क्या असर पड़ता है।
