Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने टेलीकॉम और इंटरनेट प्रोवाइडर्स के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब 10,000 से ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाली कंपनियों को 24/7 कस्टमर सपोर्ट देना होगा और नियमों में चूक होने पर प्रति सर्विस एरिया **₹20 लाख** तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
TRAI ने टेलीकॉम और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल (शिकायत निवारण) ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। नए 'Telecom Consumers Complaint Redressal (Fourth Amendment) Regulations, 2026' के तहत, अब 10,000 से ज्यादा ग्राहकों वाली कंपनियों को 24/7 कंज्यूमर सपोर्ट सिस्टम रखना होगा। इसमें यह भी अनिवार्य है कि कम से कम 16 घंटे तक ग्राहकों को 'ह्यूमन असिस्टेंट' यानी सीधे कर्मचारी से बात करने की सुविधा मिले।
पेनाल्टी का स्ट्रक्चर और फाइनेंशियल असर
नए नियमों के मुताबिक, गलत तरीके से शिकायत बंद करने पर कंपनी पर ₹1,000 और अपील को ठीक से हैंडल न करने पर ₹5,000 का जुर्माना लगेगा। हालांकि ये जुर्माना छोटा लग सकता है, लेकिन हर सर्विस एरिया के लिए तिमाही आधार पर इसकी सीमा ₹20 लाख तय की गई है। इतना ही नहीं, ग्राहक अब 30 दिन के बजाय सिर्फ 15 दिन के भीतर अपील कर सकेंगे, और तिमाही रिपोर्ट न देने पर ₹10 लाख तक का अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।
ऑपरेशन्स पर दबाव और कंपनियों की चुनौती
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता ऑपरेशन्स की लागत (Operational Costs) बढ़ना है। 16 घंटे की ह्यूमन असिस्टेंस के लिए कंपनियों को बड़े स्तर पर स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा। साथ ही, अब कंपनियों को अपने कस्टमर सैटिस्फैक्शन रिपोर्ट्स सीधे CEO और बोर्ड के सामने रखनी होंगी, जिससे कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी। गौरतलब है कि 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में 73,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिसके बाद रेगुलेटर ने यह कदम उठाया है। Vodafone Idea पर पहले ही ₹89.16 लाख का जुर्माना लग चुका है, जो सख्त निगरानी का संकेत है। अब देखना होगा कि Bharti Airtel और Reliance Jio जैसे दिग्गज अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करते हैं, जबकि छोटे ISPs के लिए यह अनुपालन (Compliance) और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
