TRAI के नए नियम: AI से जुड़ी हर गड़बड़ी के लिए टेलीकॉम कंपनियां होंगी जिम्मेदार

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AuthorAditya Rao|Published at:
TRAI के नए नियम: AI से जुड़ी हर गड़बड़ी के लिए टेलीकॉम कंपनियां होंगी जिम्मेदार

TRAI ने एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स अब अपनी सभी AI प्रणालियों के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे। इससे Bharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea जैसी कंपनियों पर कंप्लायंस और ऑडिट का खर्च बढ़ सकता है।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलीकॉम सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। प्रस्तावित नियमों के तहत, AI सिस्टम से होने वाले किसी भी परिणाम के लिए सीधे टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह नियम उन सभी AI मॉडल्स पर लागू होगा जो नेटवर्क में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, चाहे वे इन-हाउस विकसित हों या किसी थर्ड-पार्टी वेंडर से खरीदे गए हों।\n\n### जवाबदेही और रिस्क क्लासिफिकेशन\n\nनए प्रस्तावों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को अपनी AI कार्यप्रणाली के लिए एक औपचारिक रिस्क क्लासिफिकेशन सिस्टम बनाना होगा। इन प्रणालियों को नेटवर्क स्टेबिलिटी, डेटा सुरक्षा और फाइनेंशियल सर्विसेज पर उनके संभावित प्रभाव के आधार पर 'हाई', 'मीडियम' या 'लो-रिस्क' श्रेणियों में बांटा जाएगा। रेगुलेटर ने कंपनियों को विशेष गवर्नेंस और सेफ्टी कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सभी AI रणनीतियों के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी अनिवार्य होगी, जिससे AI की निगरानी अब एक स्वैच्छिक प्रक्रिया न रहकर एक सख्त कंप्लायंस दायित्व बन जाएगी।\n\n### ऑपरेशनल कॉस्ट पर असर\n\nBharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea जैसे बड़े ऑपरेटर्स के लिए यह रेगुलेटरी बदलाव शॉर्ट टर्म में ऑपरेशनल खर्च बढ़ा सकता है। इन मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को डॉक्यूमेंटेशन, ऑडिट ट्रेल और AI लॉजिक के वैलिडेशन में भारी निवेश करना पड़ सकता है। हालांकि यह कदम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने के लिए है, लेकिन रिपोर्टिंग और रेगुलेटरी सख्ती के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है।\n\n### सुरक्षा और आगे की राह\n\nयह पहल डिजिटल बैंकिंग और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच आई है। रेगुलेटर का उद्देश्य कनेक्टिविटी लेयर को जवाबदेह बनाकर उन जोखिमों को कम करना है, जो सेंसिटिव फाइनेंशियल सर्विसेज को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल इंडस्ट्री कंसल्टेशन फेज में है और रेगुलेटर ने 27 नवंबर, 2026 तक प्रस्तावित फ्रेमवर्क पर फीडबैक आमंत्रित किया है। निवेशक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स फाइनल नोटिफिकेशन पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

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