Swiggy को 7 सितंबर, 2026 से MSCI ग्लोबल इंडेक्स से बाहर कर दिया जाएगा। विदेशी हिस्सेदारी की सीमा कम करने के चलते यह कदम उठाया गया है, जिससे बाजार में $46 करोड़ (करीब ₹3,800 करोड़) तक की पैसिव सेलिंग (Passive Selling) का दबाव बन सकता है।
इंडेक्स से बाहर होने की मुख्य वजह
Swiggy ने अपनी विदेशी हिस्सेदारी को 49.5% तक सीमित रखने का बड़ा फैसला लिया है ताकि कंपनी को पूरी तरह से 'भारतीय स्वामित्व' वाली कैटेगरी में रखा जा सके। इसी बदलाव के कारण MSCI ने Swiggy को अपने ग्लोबल स्टैंडर्ड और मिड-कैप इंडेक्स से बाहर करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 सितंबर, 2026 से प्रभावी हो जाएगा।
कितना बड़ा होगा बिकवाली का दबाव?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस इंडेक्स रीबैलेंसिंग से भारी बिकवाली देखने को मिलेगी। MSCI इंडेक्स से करीब $33 करोड़ की पैसिव सेलिंग की आशंका है। इसके अलावा FTSE इंडेक्स की ओर से कंपनी के 'इन्वेस्टेबिलिटी वेट' (investability weight) को कम किए जाने से कुल बिकवाली $42 करोड़ से $46 करोड़ के बीच रह सकती है।
NSDL की 'रेड फ्लैग' लिस्ट का असर
यह कदम Swiggy को 1 सितंबर, 2026 को NSDL की 'रेड फ्लैग' लिस्ट में शामिल किए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। यह लिस्ट उन कंपनियों के लिए होती है जहां विदेशी निवेश अपनी तय सीमा के करीब पहुंच जाता है। कंपनी ने भारतीय पहचान बचाने के लिए हिस्सेदारी को सीमित तो कर दिया, लेकिन अब इसका असर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की मांग पर पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
कंपनी के फाइनेंशियल हाल पर नजर डालें तो Q1 FY27 में Swiggy का नेट लॉस ₹791 करोड़ रहा है, जबकि रेवेन्यू ₹6,812 करोड़ दर्ज किया गया। फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स सेक्टर में कड़े मुकाबले के बीच, अब मैनेजमेंट के लिए प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाना और नई ओनरशिप स्ट्रक्चर के साथ बैलेंस बनाना बड़ी चुनौती है। 7 सितंबर के आसपास शेयरों में हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसके बाद ही बाजार की अगली दिशा तय होगी।
