UPI पर **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर **0.4%** फीस वसूलने की सरकारी तैयारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह मामला छोटे दुकानदारों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए बेहद अहम है।
कानूनी लड़ाई की वजह
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में किया गया संशोधन सरकार को बिना संसद की उचित देखरेख के शुल्क लगाने की अत्यधिक शक्तियां देता है। शिकायत है कि यह शुल्क किसी औपचारिक वैधानिक आदेश के बजाय प्रेस रिलीज और FAQ के जरिए लागू किया जा रहा है, जो कानूनी जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
छोटे दुकानदारों पर क्या असर होगा?
सालों से UPI 'जीरो-फी' मॉडल पर चल रहा है, जिससे भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति आई है। छोटे दुकानदार, जिनका मार्जिन पहले से ही बेहद कम होता है, उनके लिए ₹2,000 से ऊपर की हर ट्रांजैक्शन पर 0.4% का बोझ डालना बिजनेस की गणित बिगाड़ सकता है। आशंका है कि या तो दुकानदारों की लागत बढ़ेगी या फिर इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डाला जाएगा।
RuPay कार्ड से तुलना और मांग
याचिका में 'RuPay' डेबिट कार्ड का उदाहरण देते हुए इसे मनमाना करार दिया गया है, जो बिना किसी लिमिट के 'जीरो-चार्ज' सुविधा के साथ काम कर रहे हैं। फिलहाल, याचिकाकर्ता ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है ताकि पहले एक विस्तृत प्रभाव आकलन (impact assessment) किया जा सके।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोर्ट 15 अक्टूबर की समय-सीमा पर कोई स्टे (stay) लगाता है या नहीं। यह फैसला पेमेंट एग्रीगेटर्स, बैंकों और करोड़ों छोटे व्यापारियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
