Pharma Sector: सुप्रीम कोर्ट ने NPPA को घेरा, ₹8,400 करोड़ की रिकवरी पर मांगा जवाब

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Pharma Sector: सुप्रीम कोर्ट ने NPPA को घेरा, ₹8,400 करोड़ की रिकवरी पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों से ओवरचार्जिंग के लिए वसूल किए जाने वाले ₹8,400 करोड़ के जुर्माने में देरी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने NPPA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सस्ती दवाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में दवाओं की कीमतों के रेगुलेशन पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से ट्रेड मार्जिन कैपिंग को लेकर तीखे सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि जनता के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के अधिकार के सामने आर्थिक नीतियां गौण हैं।\n\n### ₹8,400 करोड़ की वसूली का पेच\nकोर्ट की चिंता का मुख्य विषय फार्मा कंपनियों से बकाया जुर्माने की वसूली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक ओवरचार्जिंग के लिए ₹10,29.8 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से अब तक केवल ₹1,582.4 करोड़ ही वसूल हो पाए हैं। शेष ₹8,400 करोड़ का आंकड़ा पेंडिंग पड़ा है, जिस पर कोर्ट ने 'ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013' के तहत एनफोर्समेंट की सुस्त रफ्तार पर सवाल उठाए हैं।\n\n### क्या बढ़ सकता है दबाव?\nयह मामला तब गरमाया है जब NPPA ने 137 गैर-शेड्यूल एंटी-कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को अधिकतम 30% तक सीमित कर दिया था। कोर्ट का मानना है कि ऐसे कदम केवल कानूनी चुनौतियों के बाद ही क्यों उठाए जाते हैं। \n\nनिवेशकों के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण है। अब तक दवा कंपनियां नॉन-शेड्यूल दवाओं की कीमत तय करने में अधिक लचीलापन रखती थीं, जो उनके मुनाफे का बड़ा हिस्सा है। यदि सरकार कोर्ट के दबाव में आकर इन दवाओं पर सख्त प्राइस कंट्रोल लागू करती है, तो सेक्टर के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर बड़ा असर पड़ सकता है। \n\nहालांकि, इंडस्ट्री और हॉस्पिटल एसोसिएशन का तर्क है कि बहुत ज्यादा सख्त मार्जिन कैपिंग से दवाओं की रिसर्च और इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हो सकता है। फिलहाल, सभी पक्षों को दो हफ्तों के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

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