सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को सभी टोल प्लाजा पर CCTV निगरानी अनिवार्य करने का आदेश दिया है। इससे हाईवे पर अवैध पार्किंग करने वालों पर लगाम लगेगी और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स को नई सेफ्टी टेक्नोलॉजी में निवेश करना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के नेशनल हाईवेज की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने NHAI को निर्देश दिए हैं कि वे सभी टोल प्लाजा पर व्यापक CCTV निगरानी और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाएं। कोर्ट का यह फैसला हाईवे पर खड़ी होने वाली उन अनधिकृत गाड़ियों की वजह से हो रहे हादसों को रोकने के लिए आया है, जिन्हें कोर्ट ने मौतों का बड़ा कारण बताया है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में नेशनल हाईवे कुल रोड नेटवर्क का सिर्फ 2% हैं, लेकिन कुल सड़क हादसों में होने वाली मौतों में इनकी हिस्सेदारी 30% है। यह आदेश नवंबर 2023 में राजस्थान के फलौदी में हुए एक घातक एक्सीडेंट के बाद लिया गया है। कोर्ट ने अब सड़क परिवहन मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार से 2 हफ्ते में हलफनामा मांगा है। अगली सुनवाई 6 अक्टूबर, 2026 को तय की गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर असर
सड़क बनाने वाली कंपनियों और टोल ऑपरेटर्स के लिए यह निर्देश काम का बोझ और ऑपरेशनल जरूरतें बढ़ा सकता है। पहले से ही कई ऑपरेटर अपने 'एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ATMS) को अपग्रेड कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें निगरानी कैमरों और मॉनिटरिंग रूम्स के लिए अतिरिक्त कैपिटल खर्च करना पड़ सकता है।
हालांकि यह पहल रोड सेफ्टी के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इससे कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। अगर इन कैमरों को रियल-टाइम पेनल्टी सिस्टम से जोड़ा जाता है, तो ऑपरेटरों को सरकारी एजेंसियों के साथ डेटा मैनेजमेंट को लेकर तालमेल बिठाना होगा।
निवेशकों के लिए संकेत
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NHAI इस सुरक्षा नियम को कैसे लागू करता है। पहले भी कोर्ट कमर्शियल पार्किंग को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। अब मार्केट की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह बदलाव मौजूदा मेंटेनेंस बजट से पूरे होंगे या फिर सर्विलांस टेक्नोलॉजी के लिए बड़े स्तर पर नए टेंडर जारी किए जाएंगे।
