सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के खिलाफ SEBI की पुरानी अपीलों को खारिज कर दिया है। यह फैसला NSE के बहुप्रतीक्षित IPO के लिए सबसे बड़ी बाधा को दूर करता है। करीब **₹1,491.21 करोड़** के सेटलमेंट के बाद अब **₹30,000 करोड़** के इस बड़े IPO का रास्ता साफ हो गया है।
कानूनी अड़चनें खत्म, लिस्टिंग की तैयारी
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लिए कानूनी अनिश्चितता का दौर खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने को-लोकेशन (Co-location) और डार्क फाइबर मामलों में SEBI की सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। ये विवाद साल 2015 से चले आ रहे थे, जिनमें कुछ ब्रोकरों को डेटा एक्सेस में अनुचित लाभ देने के आरोप लगे थे।
सेटलमेंट का गणित
जुलाई 2026 में NSE ने रेगुलेटर के साथ ₹1,491.21 करोड़ का सेटलमेंट किया था। इस राशि का प्रावधान कंपनी ने अपने FY26 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट में पहले ही कर लिया था, इसलिए बैलेंस शीट पर इसका कोई नया प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
कैसा होगा IPO का स्ट्रक्चर?
यह IPO पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा, जिसका मतलब है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस IPO का वैल्यूएशन ₹30,000 करोड़ के आसपास रह सकता है, जो भारत के बाजार इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक होगा।
आगे क्या होगा?
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही NSE के Draft Red Herring Prospectus (DRHP) को मंजूरी मिल सकती है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि RTI एक्ट के तहत पब्लिक अथॉरिटी का मामला अभी भी कानूनी चर्चाओं का विषय बना हुआ है। अब बाजार की नजरें ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइलिंग और IPO की आधिकारिक तारीखों पर टिकी हैं।
