UPI Payments: क्या डिजिटल पेमेंट से दूर हो जाएंगे स्ट्रीट वेंडर्स? नए MDR शुल्क पर मचा बवाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
UPI Payments: क्या डिजिटल पेमेंट से दूर हो जाएंगे स्ट्रीट वेंडर्स? नए MDR शुल्क पर मचा बवाल

UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित **0.4%** के नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर विवाद छिड़ गया है। यदि **₹2,000** से ज्यादा के भुगतान पर यह शुल्क लागू होता है, तो छोटे दुकानदार डिजिटल पेमेंट लेने से मना कर सकते हैं।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने फिलहाल प्रस्तावित MDR शुल्क के रोलआउट को टाल दिया है। हालांकि, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

होलसेल सप्लाई चेन की बड़ी समस्या

सरकार ने भले ही छोटे दुकानदारों को छूट दी है, लेकिन इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस की रिपोर्ट बताती है कि करीब 70% वेंडर्स का होलसेल पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा होता है। चूंकि ये B2B ट्रांजेक्शन इस छूट के दायरे में नहीं आते, इसलिए दुकानदारों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ रहा है। मार्जिन कम होने के कारण अब कई व्यापारी फिर से नकद (Cash) के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं।

डिजिटल वॉल्यूम पर खतरा

पिछले कुछ सालों में स्ट्रीट वेंडर्स की वजह से ही UPI के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में जबरदस्त उछाल आया है। यही डेटा बैंकों को छोटे कारोबारियों की क्रेडिट प्रोफाइल समझने में मदद करता है। यदि वेंडर्स वापस कैश की ओर जाते हैं, तो इससे वित्तीय समावेशन (Financial Formalization) की प्रक्रिया पर उल्टा असर पड़ सकता है।

फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या NPCI होलसेल ट्रांजेक्शन की इस समस्या का कोई समाधान निकालेगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.