South Korea का दिग्गज National Pension Service अब भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में सीधा निवेश करने की तैयारी में है। SEBI के आसान नियमों के जरिए यह कदम भारत की सॉवरेन यील्ड्स का फायदा उठाने के लिए उठाया गया है।
SEBI के नियमों ने किया आसान
लंबे समय से बड़े ग्लोबल फंड्स भारत में एंट्री के लिए जटिल डॉक्यूमेंटेशन को बड़ी बाधा मानते थे। हालांकि, SEBI के नए सरलीकृत नियमों ने इसे बदल दिया है। अब इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को हर 10 साल में एक बार ही दस्तावेज रिन्यू कराने होंगे, जो पहले 3 साल में करना पड़ता था। साथ ही, अब एंड-इन्वेस्टर्स की डिटेल देने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे विदेशी पेंशन फंड्स का प्रशासनिक बोझ काफी कम हो गया है।
क्यों आकर्षित हैं ग्लोबल फंड्स?
भारत के सरकारी बॉन्ड्स को ग्लोबल इंडेक्स जैसे कि J.P. Morgan Government Bond Index-Emerging Markets में शामिल किए जाने के बाद से विदेशी रुझान बढ़ा है। फिलहाल, भारतीय सॉवरेन बॉन्ड्स लगभग 7% की आकर्षक यील्ड दे रहे हैं। विकसित देशों के मुकाबले यह यील्ड पेंशन फंड्स के लिए एक बड़ा 'अट्रैक्शन' है।
डेट मार्केट की ओर झुकाव
साल 2025 और 2026 का डेटा एक बड़े बदलाव को दिखाता है। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से लगभग $45 बिलियन निकाले, वहीं दूसरी ओर सरकारी बॉन्ड सेगमेंट में $14 बिलियन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह साफ दिखाता है कि विदेशी निवेशक अब शेयरों के मुकाबले भारत के डेट मार्केट की स्थिरता पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह एंट्री एक बड़ा पॉजिटिव साइन है, लेकिन निवेशकों को करेंसी रिस्क पर नजर रखनी होगी। यदि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों का मुनाफा घट सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि NPS का यह कदम क्या दूसरे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स के लिए भी रास्ता खोलेगा?
