साउथ कोरिया अब IPO की अस्थिरता को रोकने के लिए **13 नवंबर, 2026** से 'कॉर्नरस्टोन इन्वेस्टर' (Cornerstone Investor) सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस नई नीति के तहत लॉन्ग-टर्म लॉक-इन पीरियड और बेहतर प्री-मार्केट प्राइसिंग को अनिवार्य किया गया है।
बाजार की अस्थिरता पर लगाम
साउथ कोरिया के फाइनेंशियल रेगुलेटर, Financial Services Commission (FSC) ने IPO मार्केट में बढ़ती वोलाटिलिटी (Volatility) को थामने के लिए कमर कस ली है। साल 2026 में कई नए लिस्टेड शेयरों में भारी गिरावट के बाद, रेगुलेटर ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
क्या है नया 'कॉर्नरस्टोन इन्वेस्टर' सिस्टम?
इस नए सिस्टम के तहत, जो संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) शुरुआत में शेयर खरीदेंगे, उन्हें अब कम से कम 6 महीने के लिए उन शेयरों को होल्ड करना होगा। इसका मकसद लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयरों की बिकवाली को रोकना है, जिससे स्टॉक की कीमतों में शुरुआती झटकों को कम किया जा सके।
बेहतर प्राइसिंग के लिए नया प्रोसेस
FSC अब अंडरराइटर्स को 'प्री-डिमांड फोरकास्टिंग' की सुविधा दे रहा है। इसके जरिए निवेश बैंक ऑफिशियल फाइलिंग से पहले ही संस्थागत निवेशकों से संपर्क कर सकेंगे। इससे बाजार की असल डिमांड का अंदाजा लगेगा और IPO की कीमतों को मार्केट के सेंटीमेंट के हिसाब से बेहतर तरीके से सेट किया जा सकेगा।
2026 का हाल और नए आंकड़े
यह फैसला इसलिए भी जरूरी था क्योंकि साल 2026 में IPO के प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साउथ कोरिया में IPOs में औसतन 32% की गिरावट आई है, जबकि इसी दौरान व्यापक KOSPI इंडेक्स में 38% की जबरदस्त तेजी देखी गई है।
लिमिट और योग्यता
नए नियमों में फेयर एक्सेस सुनिश्चित करने के लिए सीमाएं भी तय की गई हैं:
- KOSPI पर लिस्ट होने वाली कंपनियों के लिए कॉर्नरस्टोन सब्सक्रिप्शन की कैप 20% रहेगी।
- छोटी कंपनियों यानी KOSDAQ के लिए यह लिमिट 30% तय की गई है।
निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या ये नियम IPO के 'ऑफर प्राइस' और 'ट्रेडिंग परफॉरमेंस' के बीच के बड़े अंतर को कम कर पाएंगे या नहीं।
