अक्टूबर 2026 में भारतीय Small-cap बाजार को तगड़ा झटका लगा है। निवेशकों द्वारा भारी मात्रा में लीवरेज्ड पोजीशन (MTF) काटे जाने और NSE की सख्ती के कारण Nifty Small-cap 250 इंडेक्स में **8.5%** की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय स्मॉल-कैप सेगमेंट इस समय भारी दबाव में है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो Nifty Small-cap 250 इंडेक्स में 8.5% की बड़ी गिरावट आई है। इस गिरावट की मुख्य वजह मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) पोजीशन का तेजी से अनवाइंड होना है। जब बाजार गिरता है, तो ब्रोकर गिरते हुए शेयरों को रिकवर करने के लिए मजबूरन बिकवाली (forced selling) करते हैं, जिससे एक 'सेल साइकिल' बन जाती है और बाजार और नीचे चला जाता है।
MTF बुक का घटा साइज
अक्टूबर के अंत तक, कुल MTF बुक घटकर ₹1.55 लाख करोड़ के नीचे आ गई है, जो सितंबर में रिकॉर्ड ₹1.6 लाख करोड़ के स्तर पर थी। चिंता की बात यह है कि कुल MTF एक्सपोजर का लगभग 46% हिस्सा स्मॉल-कैप सेगमेंट में है, जो इसे लिक्विडिटी में बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील बनाता है।
NSE की सख्ती और बढ़ी मुश्किलें
बाजार की इस गिरावट के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की कड़ी निगरानी ने आग में घी का काम किया है। 28 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में NSE ने ब्रोकर्स के बीच व्यापक अनुपालन विफलताओं (compliance failures) को उजागर किया है, जिसमें मार्जिन कलेक्शन और क्लाइंट फंड्स को लेकर गंभीर चूकें शामिल हैं। इन सख्ती के बाद कई ब्रोकर्स ने अपनी लेंडिंग नॉर्म्स को सख्त कर दिया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी की कमी हो गई है।
वैल्यूएशन और ब्याज दरों का रिस्क
इन्वेस्टर्स के लिए फिलहाल स्मॉल-कैप के ऊंचे वैल्यूएशन भी सिरदर्द बने हुए हैं। Nifty Small-cap 250 का P/E रेशियो अभी भी 31 गुना के आसपास है। ऊंचे ब्याज दरों के माहौल में छोटी कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है, जिससे हाई वैल्यूएशन को जस्टिफाई करना मुश्किल हो रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या म्यूचुअल फंड्स का पैसा बाजार को सपोर्ट दे पाएगा या रेगुलेटरी दबाव के चलते गिरावट का यह दौर और लंबा खिंचेगा।
