Nirmala Sitharaman: टैक्स रिव्यू के संकेत से बाजार में लौटी रौनक, क्या कम होगा LTCG और STT?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nirmala Sitharaman: टैक्स रिव्यू के संकेत से बाजार में लौटी रौनक, क्या कम होगा LTCG और STT?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट से पहले LTCG और STT पर फीडबैक सुनने के संकेत दिए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय बाजारों से **₹3 लाख करोड़** से ज्यादा की निकासी की है। इस खबर के बाद बाजार में तेजी जरूर दिखी है, लेकिन निवेशकों को सरकारी खजाने की सीमाओं पर भी नजर रखनी होगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इक्विटी निवेश पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने साफ किया है कि सरकार लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर स्टेकहोल्डर्स के सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है। यह संकेत उस समय आया है जब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली का दबाव है, जिन्होंने 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से ₹3 लाख करोड़ से अधिक बाहर निकाल लिए हैं।\n\n### बाजार का रिएक्शन और टैक्स पॉलिसी\n\nवित्त मंत्री के इस रुख से निवेशकों के सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। इस बयान के बाद 13 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। फिलहाल, ₹1.25 लाख से ज्यादा के मुनाफे पर 12.5% का LTCG टैक्स लागू है, जिसे लेकर मार्केट पार्टिसिपेंट्स लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। उनका मानना है कि ट्रेडिंग और निवेश की ऊंची लागत लॉन्ग-टर्म भागीदारी को कम कर रही है।\n\nहालांकि, निवेशकों को यह समझना होगा कि सरकार ने टैक्स घटाने या खत्म करने का कोई औपचारिक वादा नहीं किया है। किसी भी बदलाव के लिए सरकारी राजस्व और फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्यों को संतुलित करना जरूरी है, इसलिए टैक्स में बहुत बड़ी कटौती की उम्मीद फिलहाल कम ही दिख रही है।\n\n### FPI आउटफ्लो की चुनौती\n\nटैक्स पर चर्चा की यह हड़बड़ी इस साल बढ़ रही पूंजी निकासी के कारण है। केवल अक्टूबर 2026 के पहले दो हफ्तों में ही FPIs ने ₹44,166 करोड़ की निकासी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स के अलावा अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची यील्ड, मजबूत डॉलर और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे ग्लोबल कारण भी इस निकासी के लिए जिम्मेदार हैं।\n\n### निवेशकों के लिए रिस्क\n\nनिवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा सरकार के मौखिक संकेतों पर बहुत अधिक निर्भर रहना है। यदि बजट घोषणाएं उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुईं, तो बाजार में बड़ी गिरावट या वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे बजट में होने वाले आधिकारिक ऐलान पर नजर रखें, खास तौर पर होल्डिंग पीरियड, छूट की सीमा और टैक्स दरों में बदलाव पर, क्योंकि केवल टैक्स कम करना ही विदेशी पूंजी की निकासी को रोकने के लिए काफी नहीं हो सकता।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.