27 अगस्त 2026 को BSE Sensex में Closing Auction Session के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। मार्केट में **2,000** अंक से ज्यादा की गिरावट के बाद रिकवरी आई है। निवेशकों के विरोध के बावजूद SEBI ने साफ कर दिया है कि वह नई पॉलिसी को वापस नहीं लेगा।
बाजार में मची हलचल
27 अगस्त 2026 को मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन भारतीय बाजार में ऐतिहासिक अस्थिरता देखी गई। यह पहली बार था जब मार्केट ने नए Closing Auction Session (CAS) के तहत एक्सपायरी का सामना किया, जिसने पुरानी VWAP कैलकुलेशन की जगह ली है। दोपहर 3:15 बजे शुरू हुए इस ऑक्शन विंडो में Sensex अचानक 2,000 अंक टूटकर 74,988 के निचले स्तर पर पहुंच गया, हालांकि बाद में इसमें सुधार हुआ और यह 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.6 पर बंद हुआ।
क्यों है विवाद?
SEBI द्वारा 3 अगस्त 2026 को लागू किए गए इस ऑक्शन मैकेनिज्म पर ट्रेडर्स का गुस्सा फूट पड़ा है। निवेशकों का मानना है कि अंतिम 10 मिनटों में वॉलैटिलिटी इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कॉल और पुट ऑप्शंस में प्राइस प्रेडिक्शन करना मुश्किल हो गया है। डेटा पर गौर करें तो इस विंडो में रिटेल पार्टिसिपेशन 10% से भी कम है, जबकि संस्थागत खिलाड़ी (Institutional Traders) हावी हैं।
SEBI का स्टैंड साफ
बाजार के तमाम विरोध और मैनिपुलेशन के आरोपों के बावजूद, SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि रेगुलेटर इस पॉलिसी को वापस नहीं लेगा। SEBI का मानना है कि ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को मैच करने और आखिरी समय में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालिया घटनाओं ने एक्सपायरी डे पर रिस्क मैनेजमेंट की मुश्किलों को उजागर कर दिया है। स्लिपेज (Slippage) का रिस्क बढ़ने के कारण ट्रेडर्स के लिए ऑक्शन विंडो के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। बता दें कि SEBI ने हाल ही में 13 अगस्त की एक्सपायरी के दौरान CAS में हेरफेर के आरोप में Mansi Share & Stock Broking और Copthall Mauritius Investment पर कड़ी कार्रवाई भी की है, जो बताता है कि रेगुलेटर इस नई प्रक्रिया को लेकर काफी सतर्क है।
