दिवाली मुहरत ट्रेडिंग से ठीक पहले भारतीय बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। Sensex **1,718** अंक उछलकर **81,028** के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बड़ी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सुस्ती चिंता का विषय बनी हुई है।
बाजार की रफ्तार और FII का दम
भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह का अंत शानदार तरीके से किया है। बेंचमार्क इंडेक्स लगातार सातवें सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए। S&P BSE Sensex 1,718.01 अंक चढ़कर 81,028.02 पर, जबकि Nifty 50 493.75 अंकों की छलांग के साथ 25,030.35 पर बंद हुआ। यह तेजी इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय बाजार ग्लोबल टेक्नोलॉजी और AI स्टॉक्स की गिरावट से पूरी तरह अलग (decouple) रहे।
इस रैली के पीछे मुख्य वजह विदेशी पूंजी की वापसी है। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5 नवंबर, 2026 को ₹14,974 करोड़ की भारी खरीदारी की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹10,444 करोड़ के शेयर बेचे। यह विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच जारी खींचतान आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेगी।
लार्ज-कैप बनाम मिडकैप का अंतर
इंडेक्स में भले ही रौनक हो, लेकिन बाजार की अंदरूनी तस्वीर थोड़ी अलग है। तेजी पूरी तरह से लार्ज-कैप शेयरों तक ही सीमित रही। Mahindra & Mahindra, ICICI Bank, और HDFC Life जैसे स्टॉक्स ने शानदार नतीजे पेश किए, जिससे इंडेक्स को मजबूती मिली। दूसरी ओर, Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जो बताता है कि रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो पर अभी भी दबाव बना हुआ है।
अब आगे क्या?
बाजार अब 8 नवंबर, 2026 को होने वाली दिवाली मुहरत ट्रेडिंग की ओर देख रहा है। Nifty 50 के 25,000 के स्तर को पार करने के बाद एक्सपर्ट्स मुनाफावसूली (profit-booking) को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि छुट्टियों के बाद विदेशी निवेश की रफ्तार बनी रहती है या नहीं और क्या मिडकैप सेगमेंट में स्थिरता आती है। फिलहाल, ब्लू-चिप शेयरों की स्थिरता और मिडकैप में जारी उतार-चढ़ाव ही पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का सबसे अहम मंत्र है।
