7 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। US और Iran के बीच बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते Nifty 50 अब **23,900** के स्तर के नीचे कारोबार कर रहा है।
बाजार पर भू-राजनीतिक दबाव (Geopolitical Risks)
बाजार में आई इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह US और Iran के बीच गहराता तनाव है। इस अनिश्चितता के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जो भारत जैसे बड़े एनर्जी इम्पोर्टर के लिए चिंता का विषय है। तेल की बढ़ती कीमतें न सिर्फ कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डालती हैं, बल्कि आयात बिल (Import Bill) बढ़ाकर देश की महंगाई को भी हवा देती हैं।
साथ ही, US के हालिया लेबर मार्केट डेटा ने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के इंटरेस्ट रेट्स को लेकर नया डर पैदा कर दिया है। मजबूत डेटा के चलते बाजार को अब इस बात का डर सता रहा है कि फेड रेट कट करने में देरी कर सकता है, जिससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
टेक्निकल सपोर्ट और लिक्विडिटी की स्थिति
टेक्निकल चार्ट्स पर नजर डालें, तो Nifty 50 को 24,000 से 24,200 के जोन में काफी रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। अब निवेशकों की नजर 23,600 से 23,800 के क्रिटिकल सपोर्ट लेवल पर है। अगर इंडेक्स इसे होल्ड नहीं कर पाया, तो बिकवाली और तेज हो सकती है।
इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है, जिससे लिक्विडिटी कम हो गई है। हालांकि, इक्विटी में कमजोरी के बावजूद भारतीय रुपया थोड़ा मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 94.40 पर खुला, जिसमें 10 पैसे की बढ़त देखी गई। फिलहाल, बाजार की अगली चाल ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस और आने वाले मैक्रो डेटा पर निर्भर करेगी।
