भारतीय शेयर बाजार की आज सकारात्मक शुरुआत हुई है। Sensex और Nifty 50 रिकवरी के दौर को आगे बढ़ा रहे हैं। RBI द्वारा रुपये को सहारा देने की कोशिशों और क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली गिरावट ने सेंटीमेंट को बूस्ट दिया है, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी एक बड़ा रिस्क है।
भारतीय इक्विटी बाजारों ने 12 अक्टूबर, 2026 को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ की है। हफ्ते के अंतिम सत्रों में दिखी रिकवरी आज भी जारी रही और BSE Sensex व NSE Nifty 50 शुरुआती घंटों में मजबूती के साथ ट्रेड करते नजर आए।
बाजार को कहां से मिला सपोर्ट?
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह Reserve Bank of India (RBI) का दखल है। केंद्रीय बैंक ने रुपये में हो रही गिरावट को थामने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। ऑयल कंपनियों को डॉलर की जरूरतों के लिए अलग निर्देश देने और करेंसी हेजिंग के नियमों को सख्त करने से रुपये की वोलेटिलिटी को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था और आयात बिल को लेकर निवेशकों को थोड़ी राहत दी है।
निवेशकों के लिए सावधानी क्यों जरूरी?
बाजार भले ही ऊपर की ओर है, लेकिन माहौल अभी भी नाजुक बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से लगातार बिकवाली जारी है, जो भारतीय बाजारों के लिए बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें अभी भी $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं बरकरार हैं। यह ऊर्जा लागत कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता पर असर डाल सकती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह बढ़त एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन फिलहाल बाजार में अस्थिरता (Volatility) बनी रहेगी। आगे चलकर बाजार की दिशा विदेशी बिकवाली के रुकने और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनावों के शांत होने पर निर्भर करेगी। फिलहाल, ट्रेडर्स इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या बाजार दिन भर इस मजबूती को बनाए रख पाएगा या प्रॉफिट बुकिंग के चलते दबाव बढ़ेगा।
