भारतीय शेयर बाजार ने दिवाली से ठीक पहले इतिहास रच दिया है। पिछले 6 ट्रेडिंग सेशंस में Sensex और Nifty में **8%** से ज्यादा की दमदार तेजी देखी गई है। विदेशी निवेश की वापसी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी इस रैली के मुख्य इंजन रहे हैं, लेकिन अमेरिकी बाजार की गिरावट से निवेशक अब सतर्क हैं।
भारतीय बाजार इस समय एक ऐतिहासिक मुकाम पर खड़े हैं। पिछले साढ़े तीन दशकों में दिवाली से पहले बाजार का ऐसा प्रदर्शन नहीं देखा गया। इस शानदार तेजी के पीछे तीन बड़े कारण रहे हैं।
रैली के पीछे के फैक्टर्स
सबसे पहले, विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों पर दोबारा भरोसा जताया है। पिछले 6 सत्रों में उन्होंने बाजार में ₹18,661 करोड़ का भारी निवेश किया है। दूसरे, ग्लोबल स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में राहत मिली है, जहां Brent Crude ऑयल $95 प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। तीसरे, अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के नतीजों के बाद वहां की अनिश्चितता खत्म हुई है, जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट सुधरा है।
अब निवेशकों के लिए चुनौती
हालांकि बाजार में जबरदस्त मोमेंटम है, लेकिन 6 नवंबर से निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। अमेरिकी बाजारों में हुई भारी बिकवाली का असर भारतीय बाजार की सुबह की शुरुआत पर पड़ सकता है। निफ्टी के लिए 24,800 से 25,000 का स्तर एक कड़ा रेजिस्टेंस (Resistance) बना हुआ है, जहां मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सबकी नजरें 8 नवंबर 2026 को होने वाली 'मुहरत ट्रेडिंग' (Muhurat Trading) पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बाजार इस ग्लोबल अस्थिरता के बीच अपनी तेजी को बरकरार रख पाता है या त्योहारों के दौरान बाजार में स्थिरता देखने को मिलेगी।
