भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी सुस्ती देखी गई। BSE Sensex **642** अंकों से अधिक टूट गया, जबकि Nifty 50 **22,600** के अहम स्तर के नीचे फिसल गया है। ऊंची वैल्यूएशन के बीच निवेशकों की सतर्कता और प्रॉफिट बुकिंग के कारण बाजार में यह भारी दबाव बना है।
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को भारतीय इक्विटी मार्केट में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 642.51 अंक गिरकर 73,067.18 के स्तर पर आ गया, वहीं NSE Nifty 50 241.35 अंकों की गिरावट के साथ 22,570.90 पर कारोबार करता नजर आया। यह गिरावट मार्केट सेंटिमेंट में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है, जहां इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) सतर्क हो गए हैं और हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।\n\nबाजार के जानकारों का मानना है कि लंबे समय से जारी तेजी के बाद अब स्टॉक्स अपनी पीक वैल्यूएशन पर हैं, जिसके चलते ट्रेडर मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं। जब बाजार इस स्तर पर होता है, तो ग्लोबल मार्केट से आने वाली छोटी सी अनिश्चितता भी निवेशकों को रिस्क कम करने के लिए मजबूर कर देती है। खास बात यह है कि यह गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मैक्रो-इकोनॉमिक हालात को भांपते हुए एक व्यापक सुधार का संकेत है।\n\nफिलहाल मार्केट में वोलेटिलिटी काफी बढ़ गई है। ट्रेडर्स अब Nifty 50 के लिए 22,500 के सपोर्ट लेवल पर नजरें टिकाए हुए हैं। अगर बाजार इस लेवल को बचा नहीं पाता है, तो बिकवाली और तेज हो सकती है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए ऐसी गिरावट को बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा माना जाता है, जहां फोकस शॉर्ट-टर्म हलचल के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन पर होना चाहिए।\n\nअब बाजार की दिशा क्लोजिंग ट्रेड और इंट्राडे सपोर्ट लेवल्स पर निर्भर करेगी। क्या यह केवल एक अस्थायी करेक्शन है या बाजार में सतर्कता का दौर लंबा चलेगा? यह आने वाले कुछ सेशन्स में स्पष्ट हो पाएगा।
