2 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। BSE Sensex **373.93** अंक लुढ़ककर **76,570.35** पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 కీలక सपोर्ट लेवल **24,000** के नीचे फिसल गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है।
बुधवार, 2 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजारों ने लाल निशान के साथ दिन का समापन किया। BSE Sensex में 373.93 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 76,570.35 पर आ गया। वहीं, NSE Nifty 50 इंडेक्स 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 पर सिमट गया। Nifty का 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ना ट्रेडर्स के लिए चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है।
गिरावट की असली वजह (Trigger Point)
बाजार में इस बिकवाली के पीछे मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव मुख्य कारण है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता की वजह से ग्लोबल ब्रेंट क्रूड ऑइल की कीमतें $96 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह दोहरा खतरा है—इससे न केवल इंपोर्ट बिल बढ़ता है, बल्कि देश में महंगाई बढ़ने का डर भी सताता है, जो सीधे तौर पर निवेशकों के भरोसे को तोड़ता है।
सेक्टर का हाल
आईटी, ऑटोमोबाइल, मेटल, रियल्टी और सरकारी बैंकों (PSU Banks) के इंडेक्स में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। बड़े शेयरों की बात करें तो Eicher Motors, Wipro और Mahindra & Mahindra टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
आगे क्या होगा?
तकनीकी चार्ट पर Nifty का 24,000 का स्तर तोड़ना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हैं। अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो इसका असर कंपनियों के मुनाफे और भविष्य में ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
