AI से बढ़ते साइबर खतरों पर SEBI की पैनी नजर
भारतीय बाजार नियामक SEBI ने मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पन्न हो रहे साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति आगाह किया है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि AI सिस्टम बहुत तेजी से किसी भी सिस्टम की कमजोरियों का पता लगा सकते हैं, जिनका दुरुपयोग वित्तीय बाजारों को निशाना बनाने, डेटा गोपनीयता भंग करने और परिचालन स्थिरता को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
पूरे बाजार में सुरक्षा कवच मजबूत करने की जरूरत
SEBI ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सिक्योरिटीज बाजार आपस में जुड़ा हुआ है, जिसका मतलब है कि किसी एक फर्म पर हुआ साइबर हमला कई अन्य फर्मों को भी प्रभावित कर सकता है। इसी को देखते हुए, SEBI सभी विनियमित फर्मों (regulated firms) से अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की अपेक्षा करता है। इसमें निगरानी प्रणालियों (monitoring systems) को मजबूत करना और जोखिमों को साझा करने व प्रबंधित करने के लिए बाजार सहभागियों के बीच सहयोग में सुधार करना शामिल है।
नया टास्क फोर्स 'Cyber-Suraksha.ai' गठित
इन खतरों से निपटने के लिए, SEBI ने 'cyber-suraksha.ai' नामक एक नया टास्क फोर्स गठित किया है। इस टीम में प्रमुख बाजार संस्थानों, रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंटों के सदस्य शामिल हैं। यह टास्क फोर्स AI-संबंधित साइबर सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन करेगा, इन जोखिमों को कम करने के लिए रणनीतियां विकसित करेगा, महत्वपूर्ण खतरे की जानकारी साझा करने में मदद करेगा, और तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं (third-party service providers) की सुरक्षा का भी परीक्षण करेगा।
SEBI की सलाह: इन सुरक्षा कदमों पर दें ध्यान
SEBI ने तत्काल और मध्यम अवधि की कार्रवाइयों के लिए एक विस्तृत सलाह भी जारी की है। इसमें समय पर सिस्टम अपडेट, कमजोरियों के लिए नियमित जांच (AI टूल्स का उपयोग करके, यदि सहायक हो), मजबूत API सुरक्षा, और सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर्स (SOCs) के माध्यम से बेहतर निगरानी शामिल है। फर्मों को मार्केट-SOC फ्रेमवर्क के साथ एकीकरण में तेजी लानी चाहिए, जीरो-ट्रस्ट (zero-trust) जैसी उन्नत सुरक्षा अपनानी चाहिए, और हमले के क्षेत्रों को कम करने के लिए सिस्टम को मजबूत (harden) करना चाहिए। सलाह में खतरे का पता लगाने और प्रतिक्रिया के लिए AI का उपयोग करने की दीर्घकालिक योजनाएं विकसित करने और सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए विक्रेताओं (vendors) के साथ काम करने का भी सुझाव दिया गया है।
