सेबी (Sebi) ने शेयर बाजार के आखिरी 15 मिनटों में यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session) में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका मकसद मार्केट में अचानक आने वाली बड़ी उठापटक को कम करना है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
सेबी (Securities and Exchange Board of India) स्टॉक ब्रोकर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई जा सके। यह सेशन दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलता है। हाल के दिनों में देखा गया है कि इस दौरान कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और लिक्विडिटी (liquidity) की कमी देखी गई है। सेबी की कोशिश है कि मार्केट क्लोज होते समय की कीमतें सिर्फ कुछ छोटे और अचानक हुए ट्रेडों से नहीं, बल्कि व्यापक बाजार की भावना को दर्शाएं।
आर्बिट्रेज फंड्स और लिक्विडिटी पर असर
ब्रोकर्स ने एक बड़ी दिक्कत बताई है - कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन (continuous trading session) का 3:15 बजे खत्म होना। आर्बिट्रेज फंड्स (Arbitrage funds), जो भारतीय बाजारों में करीब ₹3.4 लाख करोड़ मैनेज करते हैं, कीमत के अंतर का फायदा उठाने के लिए एक साथ खरीद-बिक्री वाले ट्रेड करते हैं। लेकिन मौजूदा ऑक्शन फॉर्मेट में उन्हें न तो पक्की कीमत का भरोसा है और न ही क्वांटिटी (quantity) का। इस वजह से ये फंड्स फिलहाल इससे दूर ही हैं। इनकी गैरमौजूदगी से बड़े ऑर्डर को संभालने के लिए जरूरी कुल लिक्विडिटी कम हो जाती है। खासकर तब, जब इंडेक्स रीबैलेंस (index rebalance) होते हैं या बड़े इंस्टीट्यूशनल सेलर्स (institutional sellers) भारी बिकवाली करते हैं। इन फंड्स के बिना, ट्रेड के आखिरी पलों में मार्केट में और भी ज्यादा अप्रत्याशित मूल्य परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
इंडेक्स की चाल में दिखा अंतर
हाल के मार्केट डेटा से पता चलता है कि क्लोजिंग मिनट्स के दौरान निफ्टी 50 (Nifty 50) और सेंसेक्स (Sensex) के मूवमेंट में काफी अंतर रहा है। उदाहरण के लिए, हाल ही में निफ्टी 50 ऑक्शन सेशन के दौरान सिर्फ दो मिनट में 200 पॉइंट उछल गया, जिससे दिन की बढ़त 1.6% हो गई, जबकि सेंसेक्स 0.7% बढ़ा। मंगलवार को, निफ्टी 50 0.64% गिरकर 24,614.9 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.27% गिरकर 78,428.95 पर आ गया। ऐसे अंतर निवेशकों के लिए भ्रम पैदा करते हैं और इंडेक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की प्राइसिंग को जटिल बनाते हैं।
ऑप्शन एक्सपायरी पर रिस्क (Risk)
बीएसई (BSE) पर लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ रही है, खासकर सेंसेक्स ऑप्शन एक्सपायरी (Sensex options expiry) के लिए। मंगलवार को, बीएसई पर ऑक्शन वैल्यू सिर्फ ₹9.4 करोड़ दर्ज की गई, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दर्ज ₹1,542.4 करोड़ की तुलना में बहुत कम है। इस पतली लिक्विडिटी के कारण कीमतों में आसानी से बड़ा उतार-चढ़ाव आ जाता है। एक मामले में, निफ्टी कॉल ऑप्शन (Nifty call option) ₹164.85 पर बंद हुआ, जो ऑक्शन से पहले उसके वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (volume-weighted average price) ₹91.68 से काफी ज्यादा था। यह अनिश्चितता कुछ निवेशकों को आखिरी मिनटों में ट्रेडिंग से बचने पर मजबूर कर रही है।
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सेबी ब्रोकर्स की परिचालन संबंधी चिंताओं को कैसे दूर करता है, खासकर बड़े संस्थागत खिलाड़ियों के लिए टाइमिंग और एग्जीक्यूशन सर्टेन्टी (execution certainty) को लेकर। ऑक्शन मैकेनिज्म (auction mechanism) में किसी भी बदलाव या ब्रोकर्स के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देशों से जुड़ी कोई भी खबर मार्केट की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
