धोखाधड़ी का बदलता चेहरा
SEBI ने निवेशकों को आगाह किया है कि आजकल फ्रॉड करने वाले बड़े ही शातिर हो गए हैं। वे नकली SEBI लेटरहेड का इस्तेमाल करके सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के भुगतान की मांग कर रहे हैं, और साथ ही, खुद को 'रिस्क-फ्री' रिटर्न देने वाला फंड मैनेजर बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ये धोखेबाज लोगों के ट्रेडिंग अकाउंट की जानकारी चुराने और पैसे ऐंठने के लिए एडवांस तरीके जैसे AI, डीपफेक टेक्नोलॉजी और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ये धोखाधड़ी YouTube, WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रही है। BioCatch के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत में ऐसे फ्रॉड के मामले पिछले साल के मुकाबले तीन गुना बढ़ गए हैं। 2024 में भारत में फाइनेंशियल साइबर क्राइम से ₹22,842 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ, जिसमें 150,000 से ज्यादा लोग शिकार हुए और उन्होंने करीब ₹8,300 करोड़ गंवा दिए।
SEBI की पैनी नजर और एक्शन
इन बढ़ते मामलों से निपटने के लिए SEBI ने अपनी कमर कस ली है। सिर्फ चेतावनी जारी करने के बजाय, SEBI ऐसी कई कंपनियों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है जो बाजार में हेरफेर और गलत व्यापारिक प्रथाओं में शामिल हैं। अप्रैल 2024 से जून 2025 के बीच, SEBI ने बाजार में गड़बड़ी करने वाली 886 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की।
एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, SEBI ने 1 मई, 2026 से सभी मार्केट इंटरमीडियरीज (जैसे ब्रोकर, एडवाइजर) के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने रजिस्ट्रेशन डिटेल्स को प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य कर दिया है। इससे निवेशकों को असली और नकली कंपनियों के बीच फर्क करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, SEBI ने म्यूचुअल फंड की स्कीम्स के वर्गीकरण में भी बदलाव किए हैं, ताकि निवेशक बेहतर तरीके से समझ सकें कि वे कहां पैसा लगा रहे हैं।
मार्केट का माहौल और निवेशकों की कमजोरी
यह सब तब हो रहा है जब भारतीय शेयर बाजार तेजी से बढ़ रहा है। Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो करीब 22.30 है, जबकि पूरे भारतीय शेयर बाजार का P/E लगभग 23.56 है। हालांकि, 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बिकवाली की, लेकिन फरवरी 2026 में वे वापस खरीदार बने।
लेकिन इस ग्रोथ का फायदा उठाते हुए, फ्रॉड करने वाले 130 मिलियन से ज्यादा रजिस्टर्ड ट्रेडिंग अकाउंट वाले रिटेल इन्वेस्टर्स को अपना निशाना बना रहे हैं। भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटलीकरण भी धोखेबाजों के लिए नए रास्ते खोल रहा है, जिससे लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।
आगे की राह
SEBI का लक्ष्य अब सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि निवेशकों को जागरूक और सुरक्षित बनाना है। वे जागरूकता अभियान चला रहे हैं और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा दे रहे हैं। SEBI नई तकनीकों का इस्तेमाल करके बाजारों पर नजर रख रहा है और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसका मकसद एक ऐसा मजबूत और सूचित निवेश इकोसिस्टम बनाना है जहाँ निवेशक सुरक्षित महसूस करें।