मार्केट में हेरफेर का बढ़ता खतरा
सेबी (Sebi) ने Unison Metals Ltd. (UML) के शेयरों के भाव में बड़े पैमाने पर हेरफेर (Manipulation) करने के मामले में 15 व्यक्तियों को 3 साल के लिए मार्केट से बैन कर दिया है. इसके साथ ही, इन पर ₹3.6 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया गया है. नियामक ने 10 संस्थाओं को ₹3.87 करोड़ की अवैध कमाई वापस लौटाने का भी आदेश दिया है.
यह पूरा खेल पॉपुलर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) पर फर्जी और गुमराह करने वाली सिफारिशें (Recommendations) फैलाकर खेला गया था. ऑपरेटर्स ने इन सिफारिशों के जरिए Unison Metals के शेयरों के दाम और ट्रेडिंग वॉल्यूम को कृत्रिम रूप से (Artificially) बढ़ाया और फिर रिटेल निवेशकों को नुकसान पहुंचाकर ऊंचे दामों पर अपने शेयर बेच दिए.
कौन-कौन हैं शामिल?
सेबी की 98 पन्नों की लंबी जांच रिपोर्ट के अनुसार, यायाती हसमुखराय नाडा (Yayaati Hasmukhray Nada) इस पूरे हेरफेर के मुख्य सूत्रधार थे. उन्होंने कई साथियों के लिए ट्रेड किए. वहीं, 'सीरियल ऑफेंडर्स' माने जाने वाले जलाल अग्रवाल (Jalaj Agrawal) और अरविंद शुक्ला (Arvind Shukla) जैसे लोगों ने इस खेल में अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने गलत जानकारी फैलाई. इनके अलावा, जसवंतभाई पटेल (Jasvantbhai Patel), जिग्नेश प्रवीणभाई पेठानी (Jignesh Pravinbhai Pethani), शुक्ला परिवार के सदस्य, शैलेश एस पटेल (Shailesh S Patel), तीर्थ मेहता (Tirth Mehta), उत्तमचंद चंदनमल मेहता (Uttamchand Chandanmal Mehta) और शरद रामकृष्ण गट्टानी (Sharad Ramkrishana Gattani) जैसे कई अन्य लोगों ने सलाह देने, जानकारी फैलाने और ऑपरेटर्स को खरीदारों से जोड़ने जैसे काम किए.
यह कब तक चलेगा?
यह कार्रवाई डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले मार्केट फ्रॉड के बढ़ते खतरे को उजागर करती है. पिछले 5 फाइनेंशियल ईयर में, सेबी ने ऐसे धोखाधड़ी वाले मामलों में करीब ₹1,860 करोड़ का जुर्माना लगाया है और ₹452.60 करोड़ की वसूली का आदेश दिया है, लेकिन इस तरह के खेल लगातार सामने आ रहे हैं.
स्मॉल-कैप क्यों निशाने पर?
Unison Metals Ltd. जैसी कंपनियां, जिनका मार्केट कैप करीब ₹32 करोड़ है और शेयर का भाव ₹1.09 के आसपास चल रहा है, अक्सर ऐसे हेरफेर का शिकार बनती हैं. यह मामला ऐसे समय आया है जब स्मॉल-कैप शेयरों पर दबाव बना हुआ है. जनवरी 2026 में, Nifty Small Cap 100 इंडेक्स 4.7% गिरा, वहीं Microcap 250 इंडेक्स 5.7% टूट गया. इन छोटे स्टॉक्स में वॉल्यूम कम होने के कारण इन्हें आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता है.
सीरियल ऑफेंडर्स की चुनौती
जलाल अग्रवाल और अरविंद शुक्ला जैसे 'सीरियल ऑफेंडर्स' का बार-बार ऐसे मामलों में फंसना यह दर्शाता है कि मौजूदा प्रतिबंध (Market Ban) और जुर्माने इन अपराधियों को दोबारा ऐसा करने से रोकने में पूरी तरह कारगर नहीं हो पा रहे हैं.
आगे क्या?
सेबी का मकसद मार्केट की ईमानदारी बनाए रखना और निवेशकों का भरोसा कायम रखना है. इस मामले में लगाए गए जुर्माने और बैन भले ही बड़े हों, लेकिन यह देखना होगा कि क्या ये बार-बार हेरफेर करने वालों को भविष्य में रोक पाएंगे और डिजिटल दुनिया में चल रहे इन धोखाधड़ी वाले तरीकों पर लगाम लग पाएगी.
