STT Collections: सरकारी खजाना भर रहा है, लेकिन रिटेल ट्रेडर्स की जेब खाली; STT कलेक्शन में **53%** का उछाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
STT Collections: सरकारी खजाना भर रहा है, लेकिन रिटेल ट्रेडर्स की जेब खाली; STT कलेक्शन में **53%** का उछाल

शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर लगने वाले STT कलेक्शन में **53%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बढ़कर **₹40,214 करोड़** तक पहुंच गया है। हालांकि, बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो रहा है और **87.7%** रिटेल ट्रेडर्स नुकसान का सामना कर रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों की पूंजी पर संकट गहराता दिख रहा है।

सरकारी खजाने के लिए शेयर बाजार का रुख बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। 17 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) से ₹40,214 करोड़ की कमाई की है। यह पिछले साल के मुकाबले 53% की बड़ी बढ़त है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

रिटेल निवेशकों पर दोहरी मार

बाजार में ट्रेडिंग की लागत अब पहले जैसी नहीं रही। फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर बढ़े हुए STT ने रिटेल ट्रेडर्स की कमर तोड़ दी है। ब्रोक्रेज फीस और GST के साथ मिलकर ये टैक्स सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि कैपिटल इरोशन (पूंजी का खात्मा) का कारण बन रहे हैं। SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में रिटेल इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के कुल नुकसान में 35% हिस्सा सिर्फ ट्रांजेक्शन लागत का रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 87.7% रिटेल ट्रेडर्स घाटे में चल रहे हैं।

गिरता वॉल्यूम और लिक्विडिटी का असर

इस बदली हुई अर्थव्यवस्था का असर अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों में भी दिखने लगा है। अगस्त में डेरिवेटिव्स टर्नओवर में पिछले महीने की तुलना में 22.6% की गिरावट आई है। यह केवल टैक्स का असर नहीं है, बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा कोलैटरल नियमों को सख्त करने से प्रोफेशनल ट्रेडिंग डेस्क की लिक्विडिटी भी प्रभावित हुई है। इसी के चलते एक्सचेंज के नेट प्रॉफिट में 15% की कमी देखी गई है।

अब सवाल यह है कि क्या यह मॉडल लंबे समय तक टिक पाएगा? हालांकि सरकार का लक्ष्य ₹73,700 करोड़ का कलेक्शन पूरा करने का है, लेकिन अगर ट्रेडिंग वॉल्यूम इसी तरह घटता रहा और बाजार की अस्थिरता बनी रही, तो रिटेल भागीदारी में कमी आना निश्चित है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले महीनों में क्या वॉल्यूम स्थिर हो पाएगा या लिक्विडिटी का संकट और बढ़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.