India SME Forum ने सरकार से नई एंटी-स्पैम गाइडलाइन्स के असर का मूल्यांकन करने की मांग की है। नियम छोटे व्यवसायों पर कंप्लायंस का भारी बोझ डाल सकते हैं, जिससे डिजिटल मार्केटिंग आधारित कंपनियों के खर्च बढ़ने का खतरा है।
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा लाए जा रहे नए एंटी-स्पैम नियमों पर विवाद गहरा गया है। इंडिया SME फोरम ने सरकार से अपील की है कि इन नियमों को लागू करने से पहले उनका फाइनेंशियल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जाए। फोरम का कहना है कि वर्तमान ड्राफ्ट छोटे और माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए मुसीबत बन सकता है।\n\n### क्या हैं नए नियम और चुनौतियां?\nनए प्रस्तावों के तहत मार्केटिंग मैसेज के लिए सख्त 'कंसेंट मैनेजमेंट' प्रोटोकॉल और AI-जनरेटेड मैसेज की स्पष्ट पहचान जरूरी होगी। समस्या यह है कि कई छोटे बिजनेस अभी भी सेल्स और एडमिनिस्ट्रेशन के लिए पर्सनल मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। उनके पास बड़ी लीगल या कंप्लायंस टीमें नहीं हैं, इसलिए इन नियमों का पालन करना उनके लिए खर्चीला और मुश्किल होगा।\n\n### डिजिटल एडवर्टाइजिंग का बढ़ता दायरा\nभारत में डिजिटल एडवर्टाइजिंग का सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। साल 2025 में इसका रेवेन्यू ₹94,700 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि 26% की उछाल दर्शाता है। छोटी कंपनियां इसी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं और सीधे मोबाइल आउटरीच का इस्तेमाल अपने विस्तार के लिए करती हैं।\n\n### क्या है समाधान?\nSME फोरम का कहना है कि वे रेगुलेशन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे लचीला होना चाहिए। उन्होंने QR कोड या वेबसाइट के जरिए सहमति लेने जैसे सरल विकल्पों का सुझाव दिया है। साथ ही, उन्होंने ऑटोमेटेड 'बॉट' संदेशों और इंसानों द्वारा भेजे गए मैसेज के बीच अंतर करने की मांग की है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय फाइनल पॉलिसी में इन व्यवहारिक चुनौतियों को शामिल करेगा या नहीं।
