सरकार स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) यूनिट्स के लिए नियमों में ढील देने की तैयारी कर रही है। जल्द ही ये कंपनियां घरेलू ग्राहकों को विदेशी मुद्रा के बजाय भारतीय रुपये में बिल दे सकेंगी, जिससे ट्रांजैक्शन की जटिलता कम होगी।
बिलिंग के झंझट से मिलेगी राहत
फिलहाल SEZ में काम करने वाली कंपनियों के लिए घरेलू ग्राहकों को विदेशी मुद्रा (US Dollars) में बिल देना अनिवार्य है। इससे न केवल प्रशासनिक काम बढ़ता है, बल्कि एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव और बैंक कमीशन के चलते कंपनियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। अब वाणिज्य मंत्रालय इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए SEZ Act, 2005 की धारा 2(z) में संशोधन करने पर विचार कर रहा है।
किन सेक्टरों को होगा फायदा?
यह बदलाव खास तौर पर IT और BPO सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। बड़ी IT कंपनियां, जिनके कैंपस SEZ में स्थित हैं, उन्हें अपने रोजमर्रा के कामकाज में काफी आसानी होगी। इसके अलावा, डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनियां, जो सरकारी पीएसयू (PSUs) के साथ काम करती हैं, वे भी इस नए नियम का लाभ उठा सकेंगी। इससे घरेलू स्तर पर इन रणनीतिक सेक्टरों में काम करना अधिक सुगम होगा।
सरकार की चुनौती और आगे की राह
चूंकि SEZ को ट्रेड के मामले में 'विदेशी क्षेत्र' माना जाता है, इसलिए सरकार को इसे लागू करते समय GST और राजस्व (Revenue) से जुड़े नियमों का खास ध्यान रखना होगा। वित्त मंत्रालय और RBI इस पर काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्यात की स्थिति (export-oriented status) प्रभावित न हो। निवेशकों को अब कैबिनेट की मंजूरी और उसके बाद आने वाले गाइडलाइंस पर नजर रखनी चाहिए, जो तय करेंगे कि यह बदलाव टैक्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शन में किस तरह से लागू होगा।
