SEBI का Sarthi App vs Finfluencer: क्या 'हाइप' पर भारी पड़ेगा सच?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का Sarthi App vs Finfluencer: क्या 'हाइप' पर भारी पड़ेगा सच?
Overview

भारतीय रिटेल निवेशकों में सोशल मीडिया 'फिनफ्लुएंसर्स' का क्रेज बढ़ रहा है, जिससे उन्हें गलत जानकारी और नुकसान का खतरा है। इसे देखते हुए, SEBI ने अपना Sarthi ऐप लॉन्च किया है, जो बिना किसी पक्षपात के वित्तीय शिक्षा और स्कैम डिटेक्शन जैसे टूल्स देता है। हालांकि, इस ऐप को अनरेगुलेटेड ऑनलाइन आवाजों के खिलाफ जंग लड़नी पड़ रही है।

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फिनफ्लुएंसर का जादू और Sarthi ऐप की चुनौती

भारत में रिटेल निवेशकों का एक बड़ा वर्ग आजकल वित्तीय सलाह के लिए सोशल मीडिया पर मौजूद 'फिनफ्लुएंसर्स' का सहारा ले रहा है। यह चलन नियामकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जो निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। SEBI ने इसके जवाब में अपना Sarthi मोबाइल एप्लीकेशन पेश किया है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि यह निवेशकों की पुरानी आदतों और अनरेगुलेटेड ऑनलाइन सलाह के आकर्षण पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

सर्वे का खुलासा: 62% निवेशक फिनफ्लुएंसर से प्रेरित

SEBI के एक हालिया सर्वे से पता चला है कि 62% रिटेल निवेशक अपना निवेश निर्णय सोशल मीडिया पर सक्रिय फिनफ्लुएंसर्स के कहने पर लेते हैं। ये फिनफ्लुएंसर अपने लुभावने कंटेंट, मार्केट की जानकारी और स्ट्रैटेजीज़ को YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर करके निवेशकों का भरोसा जीतते हैं। SEBI का Sarthi ऐप, जिसे जून 2024 में अपडेट किया गया, इसके बिल्कुल विपरीत एक सीधा और आधिकारिक विकल्प प्रदान करता है। इसमें एजुकेशनल वीडियो, व्यवस्थित लर्निंग मॉड्यूल और निष्पक्ष वित्तीय टूल्स शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नए निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद और बिना किसी पक्षपात वाला सोर्स बनना है।

Sarthi के टूल्स: निवेशकों को भटकाव से बचाने के लिए

Sarthi ऐप में 'स्कैम का पता लगाएं' (Spot a Scam) जैसे टूल्स, वित्तीय स्वास्थ्य कैलकुलेटर और शिकायत निवारण प्रणाली (grievance redressal system) भी दी गई है। ये टूल्स निवेशकों को जानकारी की पुष्टि करने और जिम्मेदारी से निवेश करने में मदद करते हैं। यह SEBI के उस प्रयास का हिस्सा है जिसका मकसद निवेशक जागरूकता और आत्मविश्वास को बढ़ाना है। फिर भी, निवेशकों को सतर्क और जागरूक व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना एक बड़ी बाधा बनी हुई है। सोशल मीडिया अक्सर 'हर्ड मेंटैलिटी' (herd mentality) और 'ओवरकॉन्फिडेंस' (overconfidence) जैसे पूर्वाग्रहों को बढ़ा सकता है, जो निवेशकों को जोखिम भरे ट्रेडों की ओर धकेल सकता है। भारत में निवेश ज्ञान और वास्तविक भागीदारी के बीच एक बड़ा अंतर भी मौजूद है। Zerodha Varsity और Groww जैसे प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के एजुकेशनल रिसोर्सेज दे रहे हैं, जो सीखने के परिदृश्य को और बढ़ाते हैं।

SEBI का गलत सूचना के खिलाफ संघर्ष

SEBI ने गलत सूचनाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फरवरी 2026 तक प्रतिभूति (securities) से संबंधित 1.33 लाख से अधिक भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट को संबंधित प्लेटफॉर्म्स को भेजा है। हालांकि, ऑनलाइन कंटेंट की भारी मात्रा और उसकी रफ़्तार नियामक प्रयासों को चुनौती देती है। SEBI वर्तमान में इस कंटेंट को ट्रैक करने के लिए AI का उपयोग नहीं करता है, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों के सहयोग पर निर्भर है। SEBI के निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष (IPEF) के FY24 में रिकॉर्ड कम ₹2.8 करोड़ का उपयोग हुआ, जबकि इसका बैलेंस बढ़कर ₹533 करोड़ हो गया, जो SEBI के शिक्षा कार्यक्रमों की पहुंच पर सवाल खड़े करता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। इंटरनेट कंपनियों ने भी चिंता जताई है कि SEBI द्वारा ऑनलाइन वित्तीय सामग्री के लिए नए नियमों पर विचार करने से ओवररेगुलेशन का खतरा हो सकता है।

Sarthi को अपनाने में बाधाएं

एक तरफ संरचित वित्तीय मार्गदर्शन और दूसरी तरफ अनरेगुलेटेड सोशल मीडिया सलाह के बीच यह संघर्ष जारी रहेगा। Sarthi ऐप बाजार की गलत सूचनाओं का एक महत्वपूर्ण मुकाबला पेश करता है। इसकी सफलता SEBI की नियमों को अनुकूलित करने, ऐप की सहभागिता (engagement) को बढ़ाने और निवेशकों को 'हाइप' से हटकर सूचित निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करने की क्षमता पर निर्भर करती है। भारत में निवेशकों की सुरक्षा अब इस डिजिटल सूचना वातावरण को प्रभावी ढंग से नेविगेट करने पर बहुत हद तक निर्भर करती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.