'ऑप्टिमम रेगुलेशन' का क्या है मतलब?
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे का 'ऑप्टिमम रेगुलेशन' पर जोर देना बताता है कि कैसे मार्केट में तेजी से हो रहे बदलावों और डिजिटल खतरों के बीच रेगुलेटर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत के कैपिटल मार्केट में अब लगभग 14 करोड़ निवेशक जुड़ गए हैं, जो टेक्नोलॉजी की मदद से निवेश को आसान बनाने का नतीजा है। लेकिन, जहाँ निवेश के रास्ते खुले हैं, वहीं निवेशकों में जागरुकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इसी वजह से, रिटेल निवेशक मिस-सेलिंग, स्कैम और धोखाधड़ी का आसानी से शिकार हो रहे हैं। दुनिया भर में 2023 में ऐसे ही फ्रॉड में $1 ट्रिलियन से ज़्यादा की चपत लगी है।
टेक्नोलॉजी से साइबर फ्रॉड पर वार
SEBI ने धोखेबाजों से लड़ने के लिए कई टेक-आधारित कदम उठाए हैं। 'SEBI चेक' फैसिलिटी से निवेशक अब 30 सेकंड से भी कम समय में यह पता लगा सकते हैं कि किसी पेमेंट हैंडल को SEBI-रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी से जोड़ा गया है या नहीं। साथ ही, UPI हैंडल के लिए '@valid' पहचान अनिवार्य कर दी गई है। क्लोन ट्रेडिंग ऐप्स से बचने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों को अप्रूव्ड ब्रोकर मोबाइल ऐप्स की वाइट-लिस्ट रखने का निर्देश दिया गया है। SEBI, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे टूल्स का भी इस्तेमाल कर रहा है। 'R(AI)DAR' जैसे टूल विज्ञापन की समीक्षा करते हैं, जबकि 'सुदर्शन' सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी करने वाले इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की पहचान करता है। रेगुलेटर सोशल मीडिया और सर्च प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर भी काम कर रहा है ताकि फ्रॉड एक्टिविटीज को रोका जा सके।
निवेशकों को सुरक्षा, विवादों का निपटारा
SEBI अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लगातार बेहतर बना रहा है। 'SCORES 2.0' ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम और 'SMART ODR' प्लेटफॉर्म ने विवादों को सुलझाने में मदद की है, जिसमें करीब 8,900 विवादों का निपटारा किया गया है, जिनकी कुल रकम ₹670 करोड़ थी। रेगुलेटर ने प्राइवेट प्लेसमेंट कॉर्पोरेट बॉन्ड में मिनिमम इन्वेस्टमेंट की लिमिट घटाकर ₹10,000 कर दी है और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म की भी इजाजत दे दी है। इसके अलावा, 5 जनवरी 2026 से रिटेल निवेशकों के लिए एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग की शुरुआत की जा रही है, जिसमें गैर-अनुपालन करने वाले ब्रोकर्स पर सख्त नियम लागू होंगे। सिक्योरिटीज का डीमैटेरियलाइजेशन भी तेज हुआ है, जिसमें डीमैट अकाउंट में क्रेडिट मिलने का समय घटकर करीब 30 दिन रह गया है।
फ्रॉड रोकने की राह में चुनौतियाँ
SEBI की तरफ से की जा रही कोशिशों के बावजूद, बाज़ार में धोखाधड़ी कम करने में अभी भी चुनौतियाँ हैं। भले ही SEBI ग्रीवेंस रिड्रेसल और डिस्क्लोजर नॉर्म्स के लिए जाना जाता है, पर बाज़ार से जुड़े फ्रॉड को कम करने में इसे अभी और मेहनत करनी होगी। आजकल AI-जनरेटेड डीपफेक और सिंथेटिक पहचान जैसे नए तरीके अपनाए जा रहे हैं, जो दुनिया भर के रेगुलेटर्स के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। भारत में भी 81% लोग साइबर सिक्योरिटी को लेकर चिंतित हैं।
आगे क्या?
SEBI अपनी टेक्नोलॉजी और रेगुलेटरी सिस्टम को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, ताकि सिर्फ रिएक्शन देने के बजाय पहले से ही खतरों का पता लगाया जा सके। भविष्य में AI का इस्तेमाल मार्केट की निगरानी के लिए और बढ़ाने, 'एयर गैप' गाइडलाइंस जैसी सुरक्षा उपायों को मजबूत करने, और नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए KYC प्रक्रिया को आसान बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। रेगुलेटर का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ जारी संवाद और निवेशक जागरूकता अभियान यह बताते हैं कि SEBI बाजार के बदलते समीकरणों और टेक्नोलॉजी की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार तैयार है।