SEBI के चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडे ने रिटेल निवेशकों की सुरक्षा के लिए SME IPO नियमों में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। इसके साथ ही, बाजार से निष्क्रिय शेल (Shell) कंपनियों को बाहर निकालने की तैयारी है और स्टॉक एक्सचेंजों की सेल्फ-लिस्टिंग पर रोक लगा दी गई है।
SME मार्केट में बढ़ेगी निगरानी
SEBI ने SME सेगमेंट में बढ़ती रिटेल भागीदारी को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को दुरुस्त करने का फैसला किया है। चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडे ने साफ किया है कि लिस्टिंग स्टैंडर्ड्स को कड़ा किया जाएगा ताकि केवल वही कंपनियां पब्लिक मार्केट में आ सकें, जिनका बिजनेस मॉडल पारदर्शी और मजबूत है। इससे निवेशकों को धोखेबाजी से बचाया जा सकेगा।
शेल कंपनियों की होगी सफाई
बाजार की अखंडता को बनाए रखने के लिए, SEBI उन निष्क्रिय शेल कंपनियों को हटाएगा जो सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। आने वाले महीनों में उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी जिनकी ट्रेडिंग वॉल्यूम कम है और कामकाज अस्पष्ट है।
पावर और रेगुलेशन पर स्थिति साफ
चेयरपर्सन पांडे ने SEBI की शक्तियों के केंद्रीकरण को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि तेज रफ्तार मार्केट के लिए रेगुलेटर का त्वरित एक्शन लेना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्था के भीतर 'इंटरनल फायरवॉल' काम करते हैं, जो जांच और कानूनी फैसलों के बीच पूरी तरह से निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं।
स्टॉक एक्सचेंज की सेल्फ-लिस्टिंग पर विराम
SEBI ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद को स्टॉक मार्केट में लिस्ट नहीं कर पाएगा। नियामक का तर्क है कि एक्सचेंज 'फ्रंटलाइन सुपरवाइजर' की भूमिका निभाते हैं, इसलिए व्यावसायिक हितों और रेगुलेटरी ड्यूटी में टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।
F&O सेगमेंट पर नई रणनीति
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए SEBI ने संकेत दिया है कि वे अब इंडिविजुअल ट्रेड्स के बजाय 'सिस्टमेटिक रिस्क' मैनेज करने पर ध्यान देंगे। निवेशकों को सलाह है कि वे नई गाइडलाइंस के लिए SEBI के आधिकारिक सर्कुलर पर नजर बनाए रखें।
