SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने साफ कर दिया है कि बाजार की नीतियां अब सिर्फ ऑप्शंस ट्रेडिंग पर नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और पैसिव इन्वेस्टिंग पर केंद्रित होंगी। रेगुलेटर ने यह भी पुष्टि की कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) जारी रहेगा और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) में सुधार किया जाएगा ताकि बाजार की दक्षता बढ़ाई जा सके।
बाजार की दिशा बदलेगी SEBI!
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बाजार को एक नई दिशा देने का संकेत दिया है। उन्होंने साफ किया है कि बाजार की नीतियां अब केवल ऑप्शंस ट्रेडिंग की गतिविधियों से तय नहीं होंगी। सोमवार, 17 अगस्त 2026 को दिए अपने बयान में, चेयरमैन ने कहा कि रेगुलेटर का मुख्य जोर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने और पैसिव इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देने पर रहेगा। फिलहाल, भारतीय बाजार में पैसिव इन्वेस्टिंग का हिस्सा लगभग 30% है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) रहेगा जारी
3 अगस्त 2026 को लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बारे में SEBI चेयरमैन ने पुष्टि की कि यह व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, कुछ बाजार सहभागियों ने पुराने ट्रेडिंग सिस्टम को एकीकृत करने और शुरुआत में देखी गई अस्थिरता को लेकर चिंताएं जताई हैं। SEBI इन आंकड़ों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। रेगुलेटर ने कहा कि बाजार में हेरफेर का कोई सबूत नहीं मिला है और पुरानी मूल्य निर्धारण प्रणाली से संक्रमण के बाद से भागीदारी में सुधार हुआ है।
SLBM में बड़े सुधार की तैयारी
रेगुलेटर का एक प्रमुख फोकस सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) में आगामी बड़े सुधारों पर है। SEBI वर्तमान में इस सेगमेंट की पुरानी चुनौतियों से निपटने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर तैयार कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, सीमित भागीदारी और उच्च उधार लागत ने इस क्षेत्र में लिक्विडिटी को बाधित किया है। SLBM फ्रेमवर्क में सुधार करके, रेगुलेटर का लक्ष्य क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को बेहतर समर्थन देना और इंटर-एक्सचेंज आर्बिट्रेज को बढ़ाना है, जिससे समग्र कैश मार्केट को गहराई मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए, ये बदलाव डेरिवेटिव की शॉर्ट-टर्म रणनीतियों के बजाय कैश मार्केट की संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक कदम को दर्शाते हैं। हालांकि, इस बदलाव से परिचालन संबंधी चुनौतियां भी खड़ी होंगी। कई संस्थानों को अभी भी अपने एल्गोरिथम ट्रेडिंग सिस्टम को नए CAS ढांचे के अनुरूप अपडेट करना होगा। बाजार के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम SLBM पर कंसल्टेशन पेपर का जारी होना होगा, क्योंकि उधार लागत या भागीदारी नियमों में कोई भी बदलाव संभवतः बाजार की लिक्विडिटी और भविष्य की ट्रेडिंग रणनीतियों को प्रभावित करेगा। रेगुलेटर का स्पष्ट रुख बताता है कि भविष्य की नीतियां ऑप्शंस सेगमेंट से जुड़ी तेज-तर्रार ट्रेडिंग के माहौल के बजाय संरचनात्मक स्थिरता का पक्ष लेंगी।
