SEBI अपने eCAS (electronic consolidated account statement) सिस्टम को और एडवांस बनाने जा रहा है। अब इसमें बैंक डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड की डीटेल्स भी शामिल होंगी, जिससे निवेशकों को अपने सभी फाइनेंशियल एसेट्स का एक सिंगल डैशबोर्ड मिल सकेगा।
फाइनेंशियल एसेट्स का मिलेगा वन-व्यू
SEBI अब रिटेल निवेशकों के लिए अपनी फाइनेंशियल एसेट्स को ट्रैक करना आसान बना रहा है। अब तक eCAS केवल डीमैट और सिक्योरिटीज़ डेटा तक सीमित था, लेकिन अब इसमें बैंक डिपॉजिट की जानकारी को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए 'अकाउंट एग्रीगेटर' (AA) फ्रेमवर्क का उपयोग किया जा रहा है, जो बैंकिंग सिस्टम और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स के बीच एक सुरक्षित पुल की तरह काम करेगा।
डेटा की जटिलता होगी खत्म
अभी के समय में निवेशकों को अलग-अलग बैंकों और प्लेटफॉर्म्स पर अपनी जानकारी खोजनी पड़ती है। इस नए कदम से eCAS सिर्फ एक होल्डिंग स्टेटमेंट न रहकर फाइनेंशियल एनालिसिस का एक बेहतरीन टूल बन जाएगा। इस काम में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का पूरा सहयोग लिया जा रहा है, ताकि पूरा सिस्टम इंटर-ऑपरेबल रहे और डेटा किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहे।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर
डेटा प्राइवेसी को लेकर SEBI काफी सतर्क है। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 'सहमति' (Sahamati) के साथ काम किया जा रहा है, जो कि एक इंडस्ट्री एलायंस है। सिस्टम में डेटा हैंडलिंग के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं ताकि निवेशकों का कंसेंट (Consent) पूरी तरह सुरक्षित रहे। भविष्य में निवेशकों के लिए अपनी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल को मैनेज करना न केवल आसान होगा, बल्कि यह काफी ज्यादा पारदर्शी भी बनेगा।
