SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शेल कंपनियों को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। बाजार में चल रहे 'पंप एंड डंप' स्कैम पर लगाम लगाने के लिए ऐसी कंपनियों को डीलिस्ट किया जाएगा, जिनका कोई वास्तविक बिजनेस नहीं है। साथ ही, विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को सरल बनाया जा रहा है ताकि मार्केट में ज्यादा ग्लोबल कैपिटल आ सके।
बाजार से बाहर होंगी शेल कंपनियां
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) उन कंपनियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने की तैयारी में है जो स्टॉक एक्सचेंज पर तो लिस्टेड हैं, लेकिन जिनका असल में कोई कारोबार नहीं है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने साफ किया है कि ऐसी 'डॉर्मेंट' (निष्क्रिय) कंपनियां मार्केट की सेहत के लिए बड़ा खतरा हैं। ये कंपनियां अक्सर शेल के रूप में काम करती हैं और मैनिपुलेटर्स के लिए धोखाधड़ी का अड्डा बन जाती हैं।
कैसे बचें 'पंप एंड डंप' के जाल से?
ये निष्क्रिय कंपनियां अक्सर 'पंप एंड डंप' स्कीम का शिकार होती हैं। इसमें खराब नीयत वाले लोग कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में फर्जी डिमांड पैदा कर भाव बढ़ा देते हैं और सोशल मीडिया के जरिए भोले-भाले निवेशकों को फंसाते हैं। जब भाव बढ़ जाता है, तो ये लोग अपना मुनाफा लेकर निकल जाते हैं और रिटेल इन्वेस्टर्स फंस जाते हैं। SEBI अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करेगा ताकि सोशल मीडिया और ट्रेडिंग पैटर्न्स को ट्रैक कर ऐसी संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।
विदेशी निवेशकों के लिए नई राह
जहां एक तरफ रेगुलेटर घरेलू स्तर पर सख्ती कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए मार्केट को आकर्षक बनाने की तैयारी है। SEBI अगले कुछ हफ्तों में एक कंसल्टेशन पेपर लाएगा, जिसमें डिस्क्लोजर और कंसंट्रेशन लिमिट्स को आसान बनाया जा सकता है। इसके अलावा, 1 दिसंबर 2026 से FPI के लिए KYC रिव्यू का समय बढ़ाकर 8 साल तक किया जा रहा है, जिससे ग्लोबल कैपिटल का फ्लो बढ़ेगा।
शेयरधारकों के लिए क्या है मतलब?
अगर आप माइक्रो-कैप या कम ट्रेड होने वाले शेयरों में निवेश करते हैं, तो अब आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। यदि किसी कंपनी को 'इनएक्टिव' माना जाता है और उसे डीलिस्ट किया जाता है, तो शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। अपने निवेश की सुरक्षा के लिए एक्सचेंज की फाइलिंग्स और SEBI के सर्कुलर्स पर लगातार नजर रखें।
