SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बताया कि भारतीय कैपिटल मार्केट में अब महिलाएं **25%** की बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं। हालांकि, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की जानकारी **63%** लोगों तक है, लेकिन बाजार में एक्टिव भागीदारी अभी भी महज **9.5%** है।
भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में डेमोग्राफिक बदलाव साफ दिख रहे हैं। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 'वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026' के दौरान इन आंकड़ों को साझा किया, जो वित्तीय समावेश (financial inclusion) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
म्यूचुअल फंड्स में महिलाओं का दबदबा
म्यूचुअल फंड सेक्टर में यह विकास सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां इंडिविजुअल इन्वेस्टर बेस में महिलाओं की हिस्सेदारी 27% है। महिला म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या 1.6 करोड़ के पार पहुंच गई है, और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में भी उनकी भागीदारी लगभग 23% है। इससे साफ है कि महिलाएं न केवल निवेश कर रही हैं, बल्कि फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
'प्रोजेक्ट जागरूक' और वित्तीय साक्षरता
रेगुलेटर का अब मुख्य फोकस टॉप 30 शहरों से बाहर निकलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर है। 'प्रोजेक्ट जागरूक' जैसी पहल के जरिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके वित्तीय साक्षरता बढ़ाई जा रही है। इसका मकसद पारंपरिक बचत को प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट में बदलना है।
रिटेल निवेशकों के लिए सलाह
हालांकि मार्केट में उत्साह है, लेकिन SEBI ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। रेगुलेटर का साफ कहना है कि नए निवेशक शॉर्ट-टर्म मार्केट वोलैटिलिटी (volatility) से घबराने के बजाय लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन पर फोकस करें। इसके अलावा, अनरजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स और स्कैम से बचने के लिए रेगुलेटर लगातार ऐसी संस्थाओं पर लगाम लगा रहा है ताकि रिटेल निवेशकों का भरोसा बरकरार रहे।
