भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI के पास FY26 में व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) टिप्स की संख्या बढ़कर **25** हो गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के मुकाबले काफी ज्यादा है, जो सिस्टम पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
शिकायतों में आया उछाल
SEBI के ऑफिस ऑफ इनफॉर्मेंट प्रोटेक्शन (OIP) के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 काफी सक्रिय रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 6 वर्षों में रेगुलेटर को केवल 5 टिप्स मिली थीं, जबकि अकेले FY26 में यह आंकड़ा 25 तक पहुंच गया। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 14 मामलों को निपटाया जा चुका है, जबकि 12 मामले अभी भी जांच के दायरे में हैं। यह तेजी तब आई है जब 2019 के बाद से भारतीय शेयर बाजार में 18 करोड़ से ज्यादा नए निवेशक जुड़े हैं।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह?
आम रिटेल निवेशक के लिए व्हिसलब्लोअर सिस्टम एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) जैसी गतिविधियों में अक्सर आम निवेशकों का नुकसान होता है, क्योंकि वे उन लोगों के खिलाफ दांव लगा रहे होते हैं जिनके पास गुप्त जानकारी होती है। अगर यह सिस्टम मजबूत होता है, तो बाजार में धांधली करने वालों पर नकेल कसना आसान हो जाता है।
कानून में कहां है कमी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही शिकायतें बढ़ रही हैं, लेकिन मौजूदा ढांचा अभी भी कमजोर है। सबसे बड़ी चिंता 'एंटी-रिटेलिएशन' (Anti-retaliation) कानूनों की कमी है। अमेरिका के SEC जैसे संस्थानों में 'डोड-फ्रैंक एक्ट' (Dodd-Frank Act) जैसा कड़ा कानून है, जो शिकायत करने वाले को नौकरी या अन्य नुकसान से सुरक्षा देता है। भारत में अभी भी शिकायतकर्ता को नौकरी जाने या उत्पीड़न का डर बना रहता है, क्योंकि कंपनियों को उन्हें बहाल करने या हर्जाना देने का स्पष्ट सरकारी आदेश नहीं है।
दायरा बढ़ाने की मांग
अभी SEBI का यह इनफॉर्मेंट प्रोग्राम मुख्य रूप से इनसाइडर ट्रेडिंग पर फोकस करता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर इसमें फ्रंट-रनिंग, फ्रॉड और गलत फाइनेंशियल अकाउंटिंग जैसे अपराधों को भी शामिल किया जाए, तो ओआईपी की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ सकती है। निवेशक अब नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या SEBI इन चुनौतियों को देखते हुए नियमों में बदलाव करेगा या नहीं।
