भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश की लिस्टेड कंपनियों को एक गंभीर चेतावनी जारी की है। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर 'बॉस स्कैम' के जरिए फंड फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे कंपनियों के फाइनेंस डिपार्टमेंट को निशाना बनाया जा रहा है।
AI के जरिए हो रहा है 'बॉस स्कैम' का खेल
SEBI के मुताबिक, धोखेबाज अब AI की मदद से कंपनियों के CEO, MD और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की आवाज की नकल कर रहे हैं और डीपफेक वीडियो बना रहे हैं। ये फ्रॉडस्टर इन तकनीकों का इस्तेमाल कर फाइनेंस टीमों को झांसा देकर अनधिकृत फंड ट्रांसफर करवाने में सफल हो रहे हैं। ये कॉल या मैसेज अक्सर Microsoft Teams, WhatsApp और ऑफिशियल ईमेल जैसे सामान्य कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म पर आते हैं।
फ्रॉड का नया तरीका: मैलवेयर वाले ZIP फाइल
इन स्कैम के अलावा, SEBI ने यह भी बताया है कि जालसाज मैलवेयर वाली कंप्रेस्ड ZIP फाइलें भी भेज रहे हैं। अगर कोई कर्मचारी इसे कंपनी के कंप्यूटर पर खोलता है, तो यह WhatsApp Web सेशन को हैक कर सकता है। इससे स्कैमर कंपनी की चल रही बातचीत पर नजर रख सकते हैं और असली खातों से ही धोखाधड़ी वाले पेमेंट निर्देश भेज सकते हैं।
SEBI ने कंपनियों को दिए खास निर्देश
इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए SEBI ने कंपनियों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। फाइनेंस टीमों को यह सलाह दी गई है कि वे डिजिटल चैनल से मिले किसी भी भुगतान निर्देश पर केवल उसी आधार पर कार्रवाई न करें। किसी भी बड़े या असामान्य ट्रांज़ैक्शन के लिए, कथित वरिष्ठ अधिकारी से सीधे फोन पर या व्यक्तिगत रूप से कन्फर्म करना ज़रूरी है।
SEBI ने कंपनियों को अपने सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए WhatsApp Web सेशन से नियमित रूप से लॉगआउट करने और अनजान फाइलों या अटैचमेंट को न खोलने जैसी साइबर सुरक्षा की आदतें अपनाने की भी सलाह दी है। यदि कोई कंपनी इस तरह के फ्रॉड का शिकार होती है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करना होगा।
