SEBI के होल-टाइम मेंबर संदीप प्रधान ने साफ कर दिया है कि Alternative Investment Funds (AIFs) को मिलने वाली रेगुलेटरी फ्लेक्सिबिलिटी के साथ अब और भी सख्त गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स लागू होंगे। रेगुलेटर अब रिस्क-बेस्ड सुपरविजन पर जोर दे रहा है और जल्द ही 4 लाख तक एक्रेडिटेड इन्वेस्टर्स का दायरा बढ़ाने की तैयारी है।
SEBI ने Alternative Investment Fund (AIF) इंडस्ट्री के लिए एक स्पष्ट लाइन खींच दी है। रेगुलेटर का मानना है कि ऑपरेशनल आजादी का यह कतई मतलब नहीं है कि रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स से समझौता किया जाए। SEBI के होल-टाइम मेंबर संदीप प्रधान ने हाल ही में स्पष्ट किया कि अब मार्केट की निगरानी 'रिस्क-बेस्ड' और 'डेटा-ड्रिवन' मॉडल पर होगी, ताकि प्राइवेट मार्केट्स में पारदर्शिता बनी रहे।
क्यों बढ़ाई जा रही है सख्ती?
AIFs का साइज और इनका फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे सिस्टमैटिक रिस्क का खतरा भी पैदा हो गया है। इसे देखते हुए SEBI अब इन्वेस्टमेंट कमिटीज और ट्रस्टीज से इंटरनल ओवरसाइट को बेहतर करने की मांग कर रहा है। मुख्य फोकस एसेट्स की वैल्यूएशन में पारदर्शिता और 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (Conflict of Interest) को रोकने पर है। अब फंड मैनेजर्स को रिपोर्टिंग और डिस्क्लोजर के कड़े नियमों का पालन करना होगा।
4 लाख इन्वेस्टर्स तक विस्तार की तैयारी
गवर्नेंस के साथ-साथ SEBI पार्टिसिपेशन का दायरा भी बढ़ा रहा है। रेगुलेटर जल्द ही एक नया सर्कुलर लाने वाला है, जिससे एक्रेडिटेड इन्वेस्टर्स (Accredited Investors) की संख्या बढ़कर 4,00,000 तक पहुंच सकती है। इस कदम का मकसद प्राइवेट मार्केट को गहरा बनाना है, लेकिन साथ ही मार्केट की ईमानदारी भी बनाए रखनी है।
डेटा से तय होगी इंडस्ट्री की मैच्योरिटी
SEBI ने इंडस्ट्री को चुनौती दी है कि वे केवल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की मांग न करें, बल्कि डेटा-आधारित प्रपोजल्स लेकर आएं। अब यह देखना होगा कि फंड मैनेजर्स खुद रिस्क प्रोफाइल मैनेज करने और अपनी गवर्नेंस स्ट्रक्चर को कितना पारदर्शी बना पाते हैं। आने वाले महीनों में रेगुलेटर के नए सर्कुलर्स पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
