बाजार में बढ़ते फ्रॉड और संदिग्ध ट्रेडिंग एक्टिविटी को रोकने के लिए SEBI अब 'Sudarshan' AI प्लेटफॉर्म का पूरा इस्तेमाल कर रहा है। रेगुलेटर ने न केवल तकनीकी टीम को बढ़ाया है, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहे स्कैम्स पर भी सख्त निगरानी बैठा दी है।
भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड ट्रेडिंग वॉल्यूम और 14 करोड़ से अधिक रिटेल निवेशकों के आने के बाद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपनी निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह से हाई-टेक कर दिया है। रेगुलेटर ने अब 200 से ज्यादा इंजीनियर्स और एनालिस्ट्स की एक मजबूत टीम तैयार की है, ताकि हाई-स्पीड एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग के डेटा को ट्रैक किया जा सके।
कैसे काम करता है 'Sudarshan'?
2021 में लॉन्च किया गया SEBI का इन-हाउस AI प्लेटफॉर्म 'Sudarshan' अब बाजार का प्रहरी बन गया है। यह सिस्टम डेरिवेटिव पोजीशन और एल्गोरिथमिक ऑर्डर्स के डेटा को स्कैन कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करता है। पहले जिन मामलों की जांच में महीनों या साल लगते थे, अब AI की मदद से उन केसों की फाइलें कुछ ही दिनों में तैयार हो रही हैं।
सोशल मीडिया पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
SEBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Telegram, Instagram और X पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं और 'पंप-एंड-डंप' स्कीमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रेगुलेटर हर महीने लगभग 7,000 पोस्ट्स को हटाने का अनुरोध भेज रहा है, जो महामारी से पहले की तुलना में 40% ज्यादा है। अब तक 1,00,000 से अधिक स्कैम-संबंधित वीडियो और पोस्ट हटाए जा चुके हैं।
AI के साथ मानवीय विवेक जरूरी
हालांकि AI बहुत तेज है, लेकिन SEBI ने डेटा पॉइजनिंग और गलत फीडिंग जैसी चुनौतियों को देखते हुए एक सख्त नियम बनाया है। सिस्टम द्वारा जेनरेट किए गए हर अलर्ट की समीक्षा एक्सपर्ट्स की टीम द्वारा की जाती है। रेगुलेटर ने साफ कर दिया है कि AI केवल एक सहायक (Assistant) की तरह है और कोई भी अंतिम कानूनी फैसला हमेशा मानवीय निगरानी में ही लिया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बनी रहे।
