Rajesh Exports: SEBI ने चेयरमैन राजेश मेहता पर बरकरार रखा ट्रेडिंग बैन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Rajesh Exports: SEBI ने चेयरमैन राजेश मेहता पर बरकरार रखा ट्रेडिंग बैन

SEBI ने Rajesh Exports के चेयरमैन राजेश मेहता पर लगा ट्रेडिंग बैन कन्फर्म कर दिया है। कंपनी पर **₹15.15 लाख करोड़** के रेवेन्यू में गड़बड़ी के आरोप हैं, जिसके बाद अब एक फॉरेंसिक ऑडिट की तलवार लटक रही है।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने Rajesh Exports Limited को लेकर एक सख्त फैसला सुनाया है। रेगुलेटर ने कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता पर लगाए गए ट्रेडिंग बैन को बरकरार रखने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स में आई भारी विसंगतियों के बाद की गई है।

रेवेन्यू पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

SEBI की जांच का मुख्य केंद्र कंपनी द्वारा दिखाया गया रेवेन्यू है। आरोप है कि कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2020-21 से 2024-25 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ का रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। रेगुलेटर का कहना है कि कुल रेवेन्यू का 97% से 99% हिस्सा विदेशी सब्सिडियरी, खासकर Valcambi SA से आता है, लेकिन कंपनी इसके ठोस दस्तावेज पेश करने में नाकाम रही है। निवेशकों के लिए यह स्थिति कंपनी की असली फाइनेंशियल सेहत को समझने में बड़ी चुनौती पैदा कर रही है।

ऑडिट और गवर्नेंस में अड़चनें

सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, बल्कि कंपनी के कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। जांच में पता चला है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने फॉरेंसिक ऑडिटर्स को अपने ERP सिस्टम और जरूरी फाइनेंशियल बुक्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, प्रमोटर से जुड़ी कंपनियों के जरिए फंड रूटिंग के आरोपों ने रेगुलेटरी दबाव और बढ़ा दिया है।

कंपनी का क्या कहना है?

Rajesh Exports ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी मैनेजमेंट का तर्क है कि यह सिर्फ अकाउंटिंग प्रोसेस को लेकर कम्युनिकेशन गैप है। हालांकि, मैनेजमेंट ने अब फॉरेंसिक ऑडिट प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है। अब निवेशकों की नजरें फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो कंपनी के भविष्य और शेयर की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.