भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकारी कंपनियों (PSUs) के स्टॉक एक्सचेंज से स्वैच्छिक डीलिस्टिंग के लिए एक नए ढांचे की घोषणा की है। पुराने जटिल बिडिंग प्रोसेस को हटाकर, अब एक निश्चित मूल्य (Fixed Price) प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें फ्लोर प्राइस पर कम से कम **15%** का प्रीमियम सुनिश्चित किया जाएगा।
डीलिस्टिंग का तरीका बदला, क्यों?
SEBI ने सरकारी कंपनियों (PSUs) के शेयर बाजार से डीलिस्ट होने के तरीके को आसान बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इस बदलाव का मकसद सरकार और लाखों छोटे निवेशकों के लिए प्रक्रिया को तेज और अधिक अनुमानित बनाना है।
पहले, PSU को डीलिस्ट करने के लिए 'रिवर्स बुक बिल्डिंग' (Reverse Book Building) प्रक्रिया का पालन करना पड़ता था। इसमें निवेशक अपनी बोली लगाते थे और कंपनी को बाजार द्वारा तय की गई कीमत को स्वीकार करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में अक्सर कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बनी रहती थी। नए नियमों के तहत, अब एक निश्चित मूल्य (Fixed Price) मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे सार्वजनिक शेयरधारकों के दो-तिहाई बहुमत की मंजूरी की आवश्यकता भी खत्म हो गई है, जो प्रक्रिया को धीमा कर देती थी।
नए नियमों के मुख्य बिंदु:
- न्यूनतम 15% प्रीमियम: नई गाइडलाइंस के अनुसार, कंपनी को एग्जिट प्राइस (Exit Price) के तौर पर गणना की गई फ्लोर प्राइस (Floor Price) से कम से कम 15% अधिक की पेशकश करनी होगी।
- निष्पक्ष मूल्यांकन: फ्लोर प्राइस तय करने के लिए SEBI ने एक मल्टी-चेक सिस्टम अनिवार्य किया है। फ्लोर प्राइस इन तीन राशियों में से सबसे अधिक होगी: पिछले 52 हफ्तों में अधिग्रहण के लिए भुगतान की गई वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस, पिछले 26 हफ्तों में भुगतान की गई उच्चतम कीमत, या दो स्वतंत्र, पंजीकृत वैल्युअर्स द्वारा निर्धारित मूल्यांकन।
- अनक्लेम्ड फंड का क्या होगा? अगर कोई निवेशक डीलिस्टिंग विंडो (Delisting Window) चूक जाता है, तो उसके पैसे डूबेंगे नहीं। अब यह पैसा स्टॉक एक्सचेंज के विशेष खाते में 7 साल के लिए रखा जाएगा। इसके बाद, यदि यह अनक्लेम्ड (Unclaimed) रहता है, तो यह निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (IEPF) में जमा कर दिया जाएगा।
किन कंपनियों पर लागू होगा ये नियम?
यह नया ढांचा केवल उन कंपनियों पर लागू होगा जहां सरकार या प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी कम से कम 90% है। हालांकि, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) और बीमा कंपनियों को इस नियम से बाहर रखा गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी:
हालांकि निश्चित मूल्य प्रणाली से स्पष्टता आती है, निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। तय की गई कीमत हमेशा कंपनी के दीर्घकालिक आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) को नहीं दर्शा सकती है, और एग्जिट विंडो के दौरान अपने शेयर न बेचने वाले निवेशकों के लिए लिक्विडिटी का जोखिम (Liquidity Risk) बना रहेगा। एक बार डीलिस्ट होने के बाद, कंपनी के शेयर सार्वजनिक एक्सचेंजों पर ट्रेड नहीं करेंगे, जिससे उन्हें बाद में बेचना मुश्किल हो जाएगा। निवेशकों को अपने PSU निवेशों से संबंधित किसी भी डीलिस्टिंग घोषणा के लिए आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
