SEBI का बड़ा ऐलान: अब पोर्टफोलियो मैनेजर्स के जरिए IPO और विदेशी शेयरों में निवेश करना हुआ आसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान: अब पोर्टफोलियो मैनेजर्स के जरिए IPO और विदेशी शेयरों में निवेश करना हुआ आसान

SEBI ने Portfolio Managers Regulations, 2026 जारी किए हैं। इसके तहत अब मैनेजर्स IPO, फॉरेन सिक्योरिटीज और प्राइमरी डेट में निवेश कर सकेंगे। साथ ही, PRIM रूट के जरिए महज **₹25 लाख** में म्यूचुअल फंड और ETF में निवेश का रास्ता खुल गया है।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के लिए नए नियम पेश किए हैं, जो इस सेक्टर में निवेश का दायरा काफी बढ़ा देंगे। इन बदलावों का मकसद मैनेजर्स को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देना है। अब पोर्टफोलियो मैनेजर्स अपने क्लाइंट्स के फंड को IPO और प्राइमरी डेट इश्यू में भी लगा सकेंगे।

नई लिमिट और नियम

डिसक्रिशनरी (Discretionary) पोर्टफोलियो मैनेजर्स को अब क्लाइंट की सहमति से अपने एसेट्स का 10% हिस्सा अनलिस्टेड, नॉन-कंवर्टिबल डेट में निवेश करने की मंजूरी दी गई है। साथ ही, डेरिवेटिव्स के लिए एक्सपोजर लिमिट क्लाइंट के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 1.25 गुना तय की गई है।

क्या है PRIM रूट?

रेगुलेटर ने 'Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund Units' (PRIM) पेश किया है। इसके जरिए निवेशक अब ₹25 लाख की मिनिमम टिकट साइज के साथ म्यूचुअल फंड और ETF में निवेश कर पाएंगे। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से SEBI ने एक 25% का प्रुडेंशियल कैप लगाया है, ताकि मैनेजर्स अपनी ही एसोसिएटेड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की स्कीम्स में जरूरत से ज्यादा पैसा न लगा सकें। इस रूट के लिए फर्म का नेट वर्थ कम से कम ₹2 करोड़ होना अनिवार्य है।

अंतरराष्ट्रीय निवेश और पारदर्शिता

नए नियमों के तहत विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश की भी अनुमति दी गई है, लेकिन यह RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के दायरे में ही होगा। निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और PRIM ऑपरेशंस के बीच स्पष्ट अंतर रखा गया है, ताकि कमीशन के लालच में गलत प्रोडक्ट बेचने जैसी समस्याओं को रोका जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.