SEBI ने अपने Document Number Verification System को अपग्रेड किया है। अब ऑफिशियल नोटिस की सत्यता जांचने के लिए 'Subject Line' अनिवार्य कर दी गई है, जिससे फर्जीवाड़ा करने वालों की पहचान आसान होगी।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 1 अक्टूबर, 2026 से अपने डॉक्यूमेंट नंबर वेरिफिकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी पत्र की प्रामाणिकता जांचने के लिए यूजर्स को उसका 'Subject Matter' दर्ज करना होगा। यह कदम आधिकारिक पत्राचार की सुरक्षा को मजबूत करने और निवेशकों को जालसाजों से बचाने के लिए उठाया गया है।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
पिछले कुछ समय में देखा गया है कि धोखेबाज SEBI के नाम से नकली दस्तावेज तैयार कर रहे थे, ताकि लोगों को डराया जा सके या उनसे संवेदनशील जानकारी निकाली जा सके। नए सिस्टम में 'Subject Line' की अनिवार्यता के कारण अब फर्जी दस्तावेज बनाना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, यह सिस्टम अब SEBI के E-Office मॉड्यूल से सीधे जुड़ गया है, जिससे ऑफिशियल रेफरेंस ट्रैक करना और भी आसान हो गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह अपडेट पारदर्शिता बढ़ाता है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि यह पोर्टल केवल यह पुष्टि करता है कि दस्तावेज वास्तव में SEBI द्वारा जारी किया गया है या नहीं। यह पोर्टल दस्तावेज के अंदर लिखे कानूनी दावों या मांगों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता। इसलिए, किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले अपनी ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) जरूर करें।
पुराना रिकॉर्ड कैसे चेक करें?
सितंबर 2026 से पहले के किसी भी कम्युनिकेशन के लिए, रेगुलेटर ने पुराने रेफरेंस चेक पर पूरी तरह निर्भर न रहने की सलाह दी है। इसके लिए आप आधिकारिक ईमेल dnvs@sebi.gov.in पर संपर्क करके पुष्टि कर सकते हैं।
