SEBI ने अपने कंसल्टेशन पेपर में एक बड़ा कदम उठाते हुए, म्यूचुअल फंड (MF) की दुनिया में निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। 5 फरवरी 2026 को जारी किए गए इस पेपर में, SEBI ने Demat खातों में रखे म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान (SWP) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) को ऑटोमेट करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम लाखों निवेशकों के लिए एक बड़ी सिरदर्दी को खत्म करेगा, जिन्हें अब तक हर ट्रांजेक्शन के लिए मैन्युअल रूप से Delivery Instruction Slips (DIS) जमा करने पड़ते थे।
Demat और SOA के बीच की खाई को पाटना
वर्तमान प्रक्रिया के तहत, Demat MF होल्डर्स को हर पीरियडिक निकासी (withdrawal) या ट्रांसफर के लिए अलग से DIS देना पड़ता था। SEBI ने इस एडमिनिस्ट्रेटिव बाधा को सिस्टमैटिक फाइनेंशियल प्लानिंग में देरी का एक बड़ा कारण माना है, जो अक्सर Demat खातों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करती है। इस नए प्रस्ताव का मकसद, पारंपरिक Statement of Account (SOA) फॉर्मेट वाले निवेशकों की तरह ही, Demat MF होल्डर्स को भी आसानी से और सिस्टमैटिक तरीके से निकासी की सुविधा देना है, जिससे Demat और SOA होल्डिंग्स के बीच की समानता स्थापित हो सके।
इंडस्ट्री ग्रोथ और Demat का बढ़ता दबदबा
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है। नवंबर 2024 तक, इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹68.08 लाख करोड़ को पार कर गया था। वहीं, भारत में Demat खातों की संख्या दिसंबर 2025 तक 21.6 करोड़ से अधिक हो गई, जबकि सितंबर 2025 तक यूनिक निवेशकों की संख्या 12 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी थी। यह बढ़ता Demat होल्डिंग वाला वर्ग दर्शाता है कि कैसे डिजिटल इन्वेस्टमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को निवेशकों की सिस्टमैटिक फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरतों के हिसाब से अलाइन करना जरूरी है।
निवेशक नियंत्रण को मजबूती और ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करना
SEBI के इस प्रस्ताव का एक और बड़ा फायदा यह है कि इससे निवेशकों को अपने ब्रोकर को ऑटोमेटेड ट्रांजेक्शन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उनकी एसेट्स की सुरक्षा बनी रहेगी। Depository सिस्टम में ही एक स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन फैसिलिटी को इंटीग्रेट करने से निवेशक सीधे अपने एसेट्स पर कंट्रोल बनाए रख सकेंगे और ऑटोमेटेड सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह कदम सेटलमेंट साइकिल को भी सुव्यवस्थित करेगा, जो वर्तमान में हर ट्रांजेक्शन के लिए ब्रोकर, एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के बीच कई स्टेप्स से गुजरती है। ऑटोमेशन से एडमिनिस्ट्रेटिव देरी कम होगी और ऑपरेशनल फेलियर का खतरा भी घटेगा।
फेज-वार इम्प्लीमेंटेशन की योजना
स्टॉक एक्सचेंज, Depositories और रजिस्ट्रार्स एंड ट्रांसफर एजेंट्स (RTAs) के प्रतिनिधियों वाली वर्किंग ग्रुप ने SOA होल्डिंग्स के बराबर की सुविधा Demat यूनिट्स के लिए भी स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन फैसिलिटी एक्सटेंड करने की सिफारिश की है। SEBI की योजना इस सुविधा को दो फेज में लागू करने की है। फेज 1 में यूनिट-आधारित ट्रांजेक्शन पर फोकस होगा, और फेज 2 में अमाउंट-आधारित पेआउट्स और स्विंग STP जैसी एडवांस रणनीतियों को RTAs के जरिए संभव बनाया जाएगा।
रेगुलेटरी कॉन्टेक्स्ट और भविष्य की उम्मीदें
यह पहल SEBI के उन लगातार प्रयासों का हिस्सा है जिनका मकसद निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अधिक पारदर्शिता लाना है। इस प्रस्ताव से Demat खातों को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट और विद्ड्रॉल स्ट्रेटेजी के लिए अधिक आकर्षक बनाने की उम्मीद है, जिससे कुल AUM को बढ़ावा मिलेगा। यह रिटेल पार्टिसिपेशन को गहरा करेगा और डिजिटल इकोसिस्टम की ओर अधिक एसेट्स को शिफ्ट कर सकता है। निवेशकों और हितधारकों के पास इस कंसल्टेशन पेपर पर अपने सुझाव देने के लिए 26 फरवरी 2026 तक का समय है।