SEBI ने डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए पुरानी VWAP यानी वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस पद्धति को फिर से बहाल करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 दिसंबर से प्रभावी होगा और हालिया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन पॉलिसी को खत्म कर देगा।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म को पूरी तरह से हटाने का निर्णय लिया है। 7 दिसंबर से डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी डे सेटलमेंट के लिए मार्केट वापस पुराने और भरोसेमंद VWAP तरीके पर लौट आएगा। अगस्त से लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के कारण बाजार में काफी अस्थिरता और कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था, जिसके चलते यह बड़ा बदलाव किया गया है।\n\n### अस्थिरता बनी बड़ी वजह\n\n3 अगस्त को पेश किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का लक्ष्य तो क्लोजिंग के वक्त बेहतर प्राइस डिस्कवरी था, लेकिन इसके विपरीत इंडेक्स में अचानक और तेज झटके देखे गए। 22 अक्टूबर का उदाहरण देखें तो महज 2 मिनट के विंडो में Sensex 2% तक गिर गया था। ऐसी अनिश्चितता से रिटेल और संस्थागत निवेशकों में घबराहट पैदा हो गई थी।\n\n### वॉल्यूम में आई भारी गिरावट\n\nइस अस्थिरता ने निवेशकों को एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग से दूर कर दिया था। इसके कारण अगस्त महीने में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के डेरिवेटिव टर्नओवर में मंथ-ऑन-मंथ 19.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।\n\nजानकारों का मानना है कि अब जब मार्केट सेटलमेंट के लिए आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग पर आधारित VWAP मेथड पर लौटेगा, तो एक्सपायरी के दिन होने वाली अफरा-तफरी पर लगाम लगेगी। बाजार को अब उम्मीद है कि इस पुराने तरीके से ट्रेडिंग पैटर्न सामान्य होंगे और लिक्विडिटी में फिर से उछाल देखने को मिलेगा।
