SEBI के नए नियम: पूर्व कर्मचारियों पर 2 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू, अब स्टॉक में सीधे निवेश नहीं

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI के नए नियम: पूर्व कर्मचारियों पर 2 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू, अब स्टॉक में सीधे निवेश नहीं

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पूर्व कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के बाद 2 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड (cooling-off period) झेलना होगा। इसके साथ ही, मौजूदा कर्मचारियों को सीधे इक्विटी (equity) में निवेश करने पर रोक लगा दी गई है।

अब पूर्व कर्मचारियों पर लगेगी 2 साल की रोक

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के सर्विस रूल्स में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों, जिन्हें 'SEBI (Employees' Service) (Amendment) Regulations, 2026' कहा जा रहा है, का मुख्य मकसद कर्मचारियों के बीच हितों के टकराव (conflict of interest) को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

इन बदलावों के तहत, SEBI के पूर्व कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद 2 साल तक किसी भी क्लाइंट का प्रतिनिधित्व SEBI के सामने कानूनी कार्यवाही, सेटलमेंट या एडजुडीकेशन मामलों में नहीं कर पाएंगे। यह नियम इसलिए लाया गया है ताकि पूर्व कर्मचारी अपनी पुरानी पहुँच या अंदरूनी जानकारी का फायदा निजी कंपनियों को न दे सकें।

मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी कड़े नियम

SEBI ने अपने मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी निवेश के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब कर्मचारी सीधे इक्विटी (equities), डेरिवेटिव्स (derivatives) और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स (equity-linked instruments) में निवेश नहीं कर सकेंगे। अपनी संपत्ति को मैनेज करने के लिए, कर्मचारियों को म्यूचुअल फंड (mutual funds) या रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) जैसे रेगुलेटेड निवेश साधनों की ओर निर्देशित किया गया है।

नए नियमों के अनुसार, कुछ रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स में कर्मचारी अपने कुल पोर्टफोलियो का अधिकतम 25% तक ही निवेश कर पाएंगे। इसमें कुछ छूट भी दी गई है, जैसे कि जीवनसाथी के स्टॉक ऑप्शंस (spousal stock options) या खास मैनेज्ड पोर्टफोलियो सर्विसेज़ के मामले में।

'परिवार' की परिभाषा का विस्तार और बढ़ी हुई पारदर्शिता

SEBI ने 'परिवार' (family) और 'आश्रितों' (dependents) की परिभाषा को भी व्यापक बनाया है, जिसमें सौतेले बच्चे, गोद लिए हुए बच्चे और ऐसे लोग शामिल हैं जो कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वित्तीय खुलासे (financial disclosures) में एक बड़ा दायरा कवर हो, जिससे संबंधित पार्टियों के माध्यम से नैतिक नियमों को दरकिनार करना मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों को अब कोई भी नौकरी का प्रस्ताव (job offer) या पेशेवर बातचीत (professional negotiations) मिलने के एक महीने के भीतर इसकी रिपोर्ट देनी होगी। इससे पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

गिफ्ट (gift) के लिए डिस्क्लोजर की सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है, जिससे प्रशासनिक रिपोर्टिंग आसान होगी। हालांकि, कुल मिलाकर, ये नए नियम एक ज़्यादा कड़े अनुपालन माहौल (compliance environment) की ओर इशारा करते हैं। SEBI सीधे स्टॉक मार्केट में भागीदारी को कम करके और सेवा के बाद की पाबंदियां लगाकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके कर्मचारी उन संस्थाओं से स्वतंत्र रहें जिनकी वे निगरानी करते हैं।

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