SEBI का डराने वाला खुलासा: FY26 में 88% रिटेल ट्रेडर्स को हुआ भारी नुकसान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का डराने वाला खुलासा: FY26 में 88% रिटेल ट्रेडर्स को हुआ भारी नुकसान

SEBI की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में 87.7% रिटेल ट्रेडर्स को डेरिवेटिव्स मार्केट में नेट लॉस हुआ है। इस दौरान कुल घाटा **₹91,685 करोड़** तक पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर ऑप्शंस ट्रेडिंग के बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा करता है।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए डेरिवेटिव्स मार्केट का डेटा जारी किया है, जो रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए एक चेतावनी की तरह है। हालांकि पिछले साल यानी FY25 में यह घाटा ₹1.12 लाख करोड़ था, लेकिन इस बार का आंकड़ा भी ₹91,685 करोड़ है, जो काफी चिंताजनक बना हुआ है।

ऑप्शंस ट्रेडिंग बना मुसीबत

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल घाटे का 92% हिस्सा सिर्फ ऑप्शंस सेगमेंट से आया है। दिलचस्प बात यह है कि करीब 97% रिटेल ट्रेडर्स अपनी सारी पूंजी इसी सेगमेंट में लगा रहे थे। ऑप्शंस ट्रेडिंग में कम पैसों से ट्रेड करने की सुविधा तो मिलती है, लेकिन यहीं पर सबसे ज्यादा जोखिम भी होता है।

डेरिवेटिव्स में घाटे की वजह

डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में 'टाइम डिके' (Time Decay) जैसा फैक्टर काम करता है, जहां समय बीतने के साथ प्रीमियम की वैल्यू घटती जाती है। कई ट्रेडर्स 'नेकेड ट्रेडिंग' (बिना किसी हेज के ट्रेड करना) करते हैं, जिससे मार्केट के मामूली उतार-चढ़ाव में भी उन्हें बड़ी चपत लगती है। भावनाओं में आकर जल्दी पैसा कमाने की होड़ में ट्रेडर्स अक्सर कैलकुलेटेड रिस्क को नजरअंदाज कर देते हैं।

रिस्क मैनेजमेंट कैसे करें?

एक्सपर्ट्स अब 'defined-risk strategies' पर जोर दे रहे हैं। इसमें स्प्रेड्स (Spreads) का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ट्रेड में घुसने से पहले ही घाटे की सीमा तय हो जाती है। यह आपके मुनाफे को सीमित कर सकता है, लेकिन आपकी पूंजी को पूरी तरह डूबने से बचाता है। SEBI की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि शेयर बाजार को जुआ न समझकर, इसे एक अनुशासित प्रोसेस की तरह लेना ही लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का सही रास्ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.